Liquor Price Hike: मदिरा प्रेमियों को महंगा पड़ेगा जाम छलकाना, दिवाली से पहले बढ़ने वाले हैं शराब के दाम
नई दिल्ली। Liquor Price Hike: राजधानी दिल्ली में शराब खरीदने वालों को आने वाले दिनों में अपनी जेब अधिक ढीली करनी पड़ सकती है। दिल्ली सरकार नई आबकारी नीति लागू करने की तैयारी में है और इसमें आबकारी शुल्क के साथ शराब की बिक्री पर मिलने वाले रिटेल मार्जिन में बदलाव की योजना पर काम किया जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, नई नीति को अक्टूबर 2026 में अधिसूचित किए जाने की संभावना है। नई व्यवस्था का उद्देश्य शराब कारोबार को नए तरीके से विनियमित करने के साथ सरकार के राजस्व में बढ़ोतरी करना बताया जा रहा है। हालांकि, यदि आबकारी शुल्क में बढ़ोतरी को मंजूरी मिलती है तो इसका सीधा असर शराब की खुदरा कीमतों पर पड़ सकता है।
नई आबकारी नीति का ड्राफ्ट तैयार
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली सरकार की नई आबकारी नीति का अंतिम ड्राफ्ट तैयार बताया जा रहा है। अब इसे अंतिम मंजूरी के लिए दिल्ली कैबिनेट और उपराज्यपाल के समक्ष भेजे जाने की प्रक्रिया आगे बढ़नी है। इसके बाद मंजूरी मिलने पर अक्टूबर में नई नीति लागू किए जाने की संभावना है। रिपोर्ट के मुताबिक, आबकारी विभाग के आयुक्त रवि झा का हाल ही में अरुणाचल प्रदेश तबादला हुआ है। नए अधिकारी की नियुक्ति के बाद प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी की प्रक्रिया में आगे बढ़ाया जाएगा।
आबकारी शुल्क बढ़ा तो कीमत पर पड़ेगा असर
नई नीति में सरकार आबकारी शुल्क बढ़ाने के विकल्प पर विचार कर रही है। मौजूदा व्यवस्था में अलग-अलग प्रकार की शराब के लिए अलग स्लैब के आधार पर शुल्क लगाया जाता है। ऐसे में शुल्क में बढ़ोतरी होने पर शराब की लागत और खुदरा कीमत दोनों प्रभावित हो सकती हैं। ब्रूअर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के महानिदेशक विनोद गिरी ने भी कहा है कि आबकारी शुल्क बढ़ने की स्थिति में शराब की कीमतों में वृद्धि हो सकती है। उनके मुताबिक, टैक्स बढ़ने से बेस प्राइस प्रभावित होता है और इसका असर आगे रिटेल मार्जिन पर भी पड़ सकता है।
रिटेल मार्जिन में बदलाव की तैयारी
सरकार शराब की दुकानों के लिए तय रिटेल मार्जिन में भी बदलाव करना चाहती है। मौजूदा व्यवस्था में प्रति बोतल एक निश्चित मार्जिन निर्धारित है। नई नीति के तहत इसे अधिक लचीला बनाने पर विचार किया जा रहा है। सरकार का तर्क है कि मार्जिन व्यवस्था में बदलाव से दुकानों पर प्रीमियम और महंगे ब्रांडों की उपलब्धता बढ़ सकती है। फिलहाल निश्चित मार्जिन के कारण कई महंगे विदेशी ब्रांड दिल्ली की दुकानों पर सीमित मात्रा में उपलब्ध होने की बात रिपोर्ट में कही गई है।
प्रीमियम शराब की दुकानों की संख्या बढ़ाने की योजना
नई आबकारी व्यवस्था के तहत दिल्ली में प्रीमियम शराब की दुकानों की संख्या बढ़ाने की भी योजना बताई जा रही है। सरकार का फोकस शराब के खुदरा कारोबार को अधिक व्यवस्थित करने और उपभोक्ताओं को ज्यादा विकल्प उपलब्ध कराने पर है। दिल्ली में फिलहाल शराब की खुदरा बिक्री सरकारी निगमों द्वारा संचालित दुकानों के जरिए होती है। नई नीति में इस व्यवस्था से जुड़े कई पहलुओं में बदलाव प्रस्तावित हैं।
होटल, क्लब और रेस्टोरेंट लाइसेंस भी चर्चा में
आबकारी व्यवस्था में होटल, क्लब और रेस्टोरेंट यानी HCR श्रेणी के लाइसेंस भी महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इन लाइसेंसों के नवीनीकरण के साथ शुल्क में बढ़ोतरी की व्यवस्था पहले ही लागू की गई है। नई नीति में शराब परोसने के समय से जुड़े नियमों में भी बदलाव की संभावना जताई गई है। लाइसेंस और अन्य शुल्क में बढ़ोतरी का अंतिम असर कारोबारियों और ग्राहकों पर कितना पड़ेगा, यह नई नीति के अंतिम प्रावधान स्पष्ट होने के बाद ही पता चलेगा।
त्योहारों के सीजन पर सरकार की नजर
दिल्ली में दिवाली और नए साल के आसपास शराब की बिक्री में आमतौर पर तेजी देखी जाती है। इसी वजह से नई आबकारी नीति को त्योहारी सीजन से पहले लागू करने की संभावित समयसीमा को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार का लक्ष्य शराब से मिलने वाले राजस्व को बढ़ाना भी है। हालांकि, कीमतों में संभावित बढ़ोतरी का शराब की मांग और ग्राहकों के व्यवहार पर क्या असर होगा, यह नीति लागू होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
अभी अंतिम मंजूरी बाकी
फिलहाल शराब की कीमतों में बढ़ोतरी को अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता, क्योंकि नई आबकारी नीति के प्रस्ताव को अभी अंतिम मंजूरी की प्रक्रिया से गुजरना है। यदि आबकारी शुल्क और रिटेल मार्जिन में बढ़ोतरी को मंजूरी मिलती है, तभी इसका असर खुदरा कीमतों पर पड़ने की संभावना है। ऐसे में दिल्ली के शराब उपभोक्ताओं के लिए अक्टूबर का महीना महत्वपूर्ण हो सकता है, क्योंकि इसी दौरान नई आबकारी नीति की तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।




