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Indigenous Satellite: ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा’…छत्तीसगढ़ की अंतरिक्ष में बड़ी छलांग, 2027 में लॉन्च होगा पहला स्वदेशी सैटेलाइट

रायपुर। Indigenous Satellite: छत्तीसगढ़ अब अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में भी अपनी पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। राजधानी रायपुर की लूनर स्पेस एजेंसी द्वारा तैयार किए जा रहे सैटेलाइट प्रोजेक्ट को लेकर बड़ी जानकारी सामने आई है। योजना के मुताबिक, वर्ष 2027 में छत्तीसगढ़ का पहला स्वदेशी सैटेलाइट लॉन्च किया जा सकता है। इस परियोजना के जरिए प्रदेश में अंतरिक्ष तकनीक और आधुनिक निगरानी व्यवस्था को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

रायपुर में तैयार हुआ सैटेलाइट का इंजीनियरिंग मॉडल

जानकारी के अनुसार, रायपुर की लूनर स्पेस एजेंसी ने सैटेलाइट का इंजीनियरिंग मॉडल तैयार कर लिया है। अब इस परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक तकनीकी प्रक्रियाओं और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की मंजूरी से जुड़ी तैयारियों पर काम किया जा रहा है।

प्रस्तावित योजना के तहत सैटेलाइट का मुख्य फ्लाइट मॉडल रायपुर में ही असेंबल किया जाएगा। इससे स्थानीय स्तर पर अंतरिक्ष तकनीक के विकास और स्वदेशी निर्माण को प्रोत्साहन मिलने की संभावना है।

550 से 600 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थापित करने की योजना

प्रस्तावित सैटेलाइट को पृथ्वी की सतह से लगभग 550 से 600 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थापित करने की योजना है। इसके लिए श्रीहरिकोटा से इसरो के रॉकेट के माध्यम से लॉन्चिंग का प्रस्ताव बताया गया है। हालांकि, वास्तविक लॉन्चिंग की तारीख और अंतिम प्रक्रिया संबंधित तकनीकी मंजूरियों पर निर्भर करेगी।

कृषि, जंगल और अवैध खनन की निगरानी में मिलेगी मदद

इस सैटेलाइट का इस्तेमाल कृषि क्षेत्र, वन संसाधनों और जमीन के उपयोग से जुड़ी गतिविधियों की निगरानी में किया जा सकता है। इसके अलावा, जंगलों में होने वाले बदलाव, प्राकृतिक संसाधनों की स्थिति और अवैध खनन जैसी गतिविधियों पर नजर रखने में भी सैटेलाइट आधारित डेटा उपयोगी साबित हो सकता है।

यदि परियोजना निर्धारित योजना के अनुसार आगे बढ़ती है, तो इससे राज्य में आधुनिक तकनीक के माध्यम से निगरानी और डेटा संग्रह की क्षमताओं को मजबूत करने का अवसर मिलेगा।

‘मेक इन इंडिया’ को मिलेगा बढ़ावा

रायपुर में सैटेलाइट के मुख्य फ्लाइट मॉडल की असेंबलिंग की योजना इस परियोजना को स्वदेशी निर्माण से जोड़ती है। इससे प्रदेश में अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में नए अवसर पैदा होने और स्थानीय तकनीकी प्रतिभाओं को प्रोत्साहन मिलने की संभावनाएं हैं।

2027 की लॉन्चिंग पर रहेंगी नजरें

Indigenous Satellite: छत्तीसगढ़ के लिए यह परियोजना अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में एक नई पहल साबित हो सकती है। हालांकि, सैटेलाइट की लॉन्चिंग से पहले तकनीकी परीक्षण, आवश्यक मंजूरियां और अन्य प्रक्रियाएं पूरी करना जरूरी होगा। ऐसे में वर्ष 2027 में प्रस्तावित लॉन्चिंग को लेकर आगे की आधिकारिक जानकारी महत्वपूर्ण रहेगी।

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