SIR Controversy: CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका, महाराष्ट्र में भी उठे वोटर लिस्ट पर सवाल
नई दिल्ली/मुंबई। SIR Controversy: चुनाव आयोग की ओर से कराए जा रहे स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) को लेकर विवाद बढ़ता दिखाई दे रहा है। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। याचिका में SIR से संबंधित कई प्रशासनिक फैसलों की वैधता पर सवाल उठाते हुए उन्हें निरस्त करने की मांग की गई है।
याचिका में द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट का हवाला दिया गया है। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि SIR से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण फैसलों पर चुनाव आयोग के अन्य दोनों चुनाव आयुक्तों की सहमति नहीं थी। याचिकाकर्ता ने इसी आधार पर आरोप लगाया है कि निर्णय प्रक्रिया में आयोग के भीतर मतभेद सामने आए।
करीब 13 करोड़ नाम हटाने की प्रक्रिया पर जांच की मांग
याचिका में SIR के दौरान मतदाता सूची से कथित तौर पर करीब 13 करोड़ नाम हटाए जाने की प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की गई है। इसके लिए विशेष जांच दल यानी SIT गठित करने का अनुरोध किया गया है। इसके अलावा पुराने फॉर्म-6 को दोबारा लागू करने और SIR के तहत लिए गए विवादित फैसलों को गैरकानूनी घोषित करने की मांग भी याचिका में की गई है।
CEC के अलावा दो अधिकारियों पर भी कार्रवाई की मांग
याचिका में CEC ज्ञानेश कुमार के साथ मनीष गर्ग IAS और चुनाव आयोग की IT प्रमुख सीमा खन्ना के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि इन अधिकारियों की ओर से जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत निर्धारित जिम्मेदारियों का पालन नहीं किया गया। याचिका में दावा किया गया है कि SIR से जुड़े फैसलों को लेकर चुनाव आयोग के अंदर असहमति की स्थिति बनी थी। याचिकाकर्ता ने अपने दावे के समर्थन में द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट का उल्लेख किया है।
महाराष्ट्र में भी हाई कोर्ट पहुंचा मामला
SIR को लेकर महाराष्ट्र में भी न्यायिक चुनौती सामने आई है। बॉम्बे हाई कोर्ट और उसकी कोल्हापुर सर्किट बेंच में अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की गई हैं। दोनों मामलों में मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया और SIR के दौरान अपनाई गई कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए हैं। कोल्हापुर सर्किट बेंच में तीन स्थानीय निवासियों ने अधिवक्ता असीम सरोदे की टीम के माध्यम से याचिका दायर की है। इसमें CEC ज्ञानेश कुमार की ओर से जारी बताए गए 14 प्रशासनिक आदेशों को रद्द करने की मांग की गई है।
याचिका के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने इन 14 मामलों में कुछ निर्णयों पर आपत्ति दर्ज की थी। विवादित मुद्दों में मतदाताओं के नाम हटाने, डेटाबेस तक पहुंच, सॉफ्टवेयर संबंधी व्यवधान और जुलाई में फॉर्म-6 में किए गए बदलाव शामिल बताए गए हैं। याचिकाकर्ताओं ने इन फैसलों को CEC and Other ECs Act, 2023 की धारा 18 के संदर्भ में चुनौती दी है।
मुंबई बेंच में भी दाखिल हुई याचिका
बॉम्बे हाई कोर्ट की प्रधान पीठ में वंचित बहुजन आघाड़ी के युवा अध्यक्ष सागर रमेश गायकवाड़ और एक अन्य निवासी की ओर से भी याचिका दाखिल की गई है। इस मामले में अधिवक्ता हेमंत घडीगांवकर, संदेश मोरे और हितेंद्र गांधी पक्ष रख रहे हैं। याचिका में सुप्रीम कोर्ट के ADR मामले में दिए गए फैसले का हवाला देते हुए SIR की प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठाए गए हैं।
घर-घर सत्यापन और वोटर हटाने पर भी सवाल
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि SIR के दौरान बूथ लेवल अधिकारी घर-घर जाकर मतदाताओं से पहचान संबंधी दस्तावेज मांग रहे हैं। उनका दावा है कि जिन मतदाताओं से संपर्क नहीं हो पाया, उनमें से कुछ को कथित तौर पर अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या डुप्लीकेट जैसी श्रेणियों में शामिल कर दिया गया। याचिका में कहा गया है कि कुछ मामलों में संबंधित मतदाताओं को पर्याप्त सुनवाई का अवसर या लिखित आदेश उपलब्ध नहीं कराया गया।
SIR रोकने के बजाय प्रक्रिया कानून के मुताबिक करने की मांग
याचिकाकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया को बाधित करना नहीं है। उनका कहना है कि SIR की पूरी प्रक्रिया कानून और निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप होनी चाहिए। महाराष्ट्र से जुड़ी याचिकाओं में हटाए गए मतदाताओं के नाम दोबारा मतदाता सूची में शामिल करने, राज्य में SIR की प्रक्रिया पर रोक लगाने और पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की गई है।
SIR Controversy: इसके लिए सेवानिवृत्त हाई कोर्ट जज की अध्यक्षता में स्वतंत्र समिति गठित करने का प्रस्ताव भी रखा गया है। अब इन याचिकाओं पर अदालतों में सुनवाई के दौरान SIR की निर्णय प्रक्रिया, मतदाता सूची में बदलाव और चुनाव आयोग के प्रशासनिक फैसलों को लेकर उठाए गए सवालों पर आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।




