Festive inflation: महंगाई और EMI के बीच पिस रहा मिडिल क्लास, त्योहारों की खरीदारी कहीं न बढ़ा दे आपके कर्ज का बोझ
मध्यमवर्गीय परिवारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती आमदनी और खर्च के बीच संतुलन बनाए रखने की है। घर का किराया, बच्चों की पढ़ाई, बिजली-पानी के बिल, राशन और आने-जाने का खर्च हर महीने बजट का बड़ा हिस्सा ले लेते हैं। इसके बाद त्योहारों के लिए अलग से पैसे बचाना आसान नहीं रह जाता।
ईंधन, परिवहन और अन्य लागतों में बढ़ोतरी का असर रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है। सब्जियां, दालें, खाद्य तेल, कपड़े और सजावट का सामान महंगा होने पर परिवारों को अपनी जरूरतों और इच्छाओं के बीच चुनाव करना पड़ता है। जिन लोगों की सैलरी में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हुई है, उनके लिए यह स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है। कई परिवारों की बचत पहले ही घरेलू जरूरतों में खर्च हो जाती है, जिससे त्योहारों के अतिरिक्त खर्च के लिए सीमित विकल्प बचते हैं।
आकर्षक ऑफर के चक्कर में बढ़ सकता है कर्ज
त्योहारी सीजन में ऑनलाइन और ऑफलाइन बाजार ग्राहकों को लुभाने के लिए कई तरह की योजनाएं पेश करते हैं। ‘अभी खरीदें, बाद में भुगतान करें’, नो-कॉस्ट EMI और छूट जैसे ऑफर खरीदारी को आसान दिखाते हैं। लेकिन इन योजनाओं की शर्तें समझे बिना खर्च करना आगे चलकर परेशानी पैदा कर सकता है।
नया स्मार्टफोन, टीवी, वॉशिंग मशीन या महंगे कपड़े खरीदने के लिए किस्तों का विकल्प आकर्षक लग सकता है। हालांकि, यदि पहले से कई EMI चल रही हों, तो एक और किस्त मासिक बजट पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती है। नो-कॉस्ट EMI में भी प्रोसेसिंग फीस, छूट की शर्तें और अन्य शुल्क जांचना जरूरी है। वहीं, क्रेडिट कार्ड का पूरा बकाया समय पर नहीं चुकाने पर ब्याज और अन्य शुल्क लग सकते हैं। इसलिए खरीदारी से पहले कुल भुगतान और मासिक किस्त का हिसाब लगाना जरूरी है।
एक कर्ज चुकाने के लिए दूसरा कर्ज लेने का खतरा
जब आमदनी का बड़ा हिस्सा EMI और पुराने बकाये चुकाने में चला जाता है, तो राशन, बच्चों की फीस और मेडिकल जरूरतों के लिए पैसे कम पड़ सकते हैं। ऐसी स्थिति में कुछ लोग पुराने कर्ज की किस्त भरने के लिए नया कर्ज लेने लगते हैं। यह सिलसिला लंबे समय तक जारी रहने पर परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर हो सकती है। आपातकाल के लिए रखी गई बचत भी खर्च होने लगती है और अचानक बीमारी, नौकरी जाने या किसी अन्य जरूरत के समय मुश्किल बढ़ जाती है। इसलिए त्योहारों की खरीदारी के लिए ऐसा कर्ज लेने से बचना चाहिए, जिसकी किस्त चुकाने के लिए जरूरी घरेलू खर्चों में कटौती करनी पड़े।
महंगाई के आंकड़े समझना भी जरूरी
महंगाई का असर केवल बाजार में वस्तुओं की कीमतों तक सीमित नहीं रहता। खाद्य पदार्थों, ईंधन और सेवाओं की कीमतें बढ़ने पर परिवारों की वास्तविक क्रय शक्ति प्रभावित होती है। यानी समान आय से पहले की तुलना में कम सामान खरीदा जा सकता है। हालांकि, महंगाई दर और ब्याज दरों के आंकड़ों को सही संदर्भ में देखना जरूरी है। खुदरा महंगाई, थोक महंगाई और रिजर्व बैंक की नीतिगत ब्याज दर अलग-अलग आर्थिक संकेतक हैं। इनमें बदलाव का असर भी अलग-अलग तरीके से पड़ता है।
रेपो रेट में बढ़ोतरी होने पर कुछ नए और मौजूदा कर्ज महंगे हो सकते हैं, लेकिन इसका असर संबंधित बैंक, लोन की ब्याज दर की व्यवस्था और कर्ज की शर्तों पर निर्भर करता है। इसलिए किसी भी महीने की महंगाई दर या ब्याज दर के बारे में जानकारी प्रकाशित करने से पहले ताजा आधिकारिक आंकड़ों की पुष्टि जरूरी है।
त्योहार की खुशियां मनाएं, लेकिन बजट के भीतर
आर्थिक दबाव से बचने के लिए त्योहारों की खरीदारी की योजना पहले से बनाना उपयोगी हो सकता है। इसके लिए कुछ आसान कदम अपनाए जा सकते हैं:
- खर्च की सीमा तय करें: बाजार जाने से पहले तय कर लें कि त्योहार पर कुल कितना खर्च करना है।
- जरूरतों को प्राथमिकता दें: जरूरी सामान और केवल इच्छा के लिए खरीदे जाने वाले सामान की अलग सूची बनाएं।
- बचत को सुरक्षित रखें: राशन, बच्चों की फीस, किराया और आपातकालीन जरूरतों के पैसे खरीदारी में खर्च न करें।
- EMI की शर्तें जांचें: ब्याज, प्रोसेसिंग फीस, किस्तों की संख्या और कुल भुगतान समझने के बाद ही खरीदारी करें।
- क्रेडिट कार्ड का सावधानी से इस्तेमाल करें: उतना ही खर्च करें, जिसका बिल समय पर पूरा चुकाया जा सके।
- छूट देखकर जल्दबाजी न करें: अलग-अलग दुकानों पर कीमतों की तुलना करें और केवल ऑफर के कारण गैरजरूरी सामान न खरीदें।
छोटी योजना से बच सकती है बड़ी परेशानी
त्योहार परिवार और समाज के साथ खुशियां बांटने का अवसर हैं, लेकिन इनके लिए अपनी आर्थिक क्षमता से अधिक खर्च करना जरूरी नहीं है। खरीदारी की योजना बनाकर, गैरजरूरी खर्च कम करके और बचत को प्राथमिकता देकर परिवार त्योहारों का आनंद भी ले सकते हैं और भविष्य की जरूरतों के लिए आर्थिक सुरक्षा भी बनाए रख सकते हैं।
Festive inflation: याद रखें, त्योहार हर साल आते हैं, लेकिन कर्ज की किस्तें कई महीनों तक बजट पर असर डाल सकती हैं। इसलिए खरीदारी से पहले अपनी आमदनी, जरूरी खर्च और मौजूदा कर्ज का आकलन करें। दिखावे या आकर्षक ऑफर के दबाव में फैसला लेने के बजाय अपनी जरूरत और भुगतान करने की क्षमता को प्राथमिकता देना ही समझदारी है।




