IAS Awanish Sharan: 10वीं में 44%, कई प्रतियोगी परीक्षाओं में असफलता…आज फिटनेस आइकॉन बने IAS अवनीश शरण
पटना। IAS Awanish Sharan: संघर्ष, मेहनत और आत्मविश्वास की मिसाल बने आईएएस अधिकारी अवनीश शरण एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार वजह उनका प्रशासनिक कार्य नहीं, बल्कि उनका शानदार फिटनेस ट्रांसफॉर्मेशन है। सोशल मीडिया पर उनकी फिटनेस की तस्वीरें तेजी से वायरल हो रही हैं, जहां लोग उनके बदलाव की तुलना बॉलीवुड अभिनेताओं से कर रहे हैं।
बिहार के समस्तीपुर जिले में जन्मे अवनीश शरण का सफर आसान नहीं रहा। उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा दलसिंहसराय स्थित आर.बी. कॉलेज से पूरी की। उन्होंने स्वयं बताया है कि वर्ष 1996 में मैट्रिक परीक्षा में उन्हें 44 प्रतिशत अंक मिले थे। इसके बाद इंटरमीडिएट में 65 प्रतिशत और स्नातक में 60.7 प्रतिशत अंक हासिल किए।

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान भी उन्हें कई बार असफलताओं का सामना करना पड़ा। उन्होंने पहले भी सार्वजनिक रूप से साझा किया है कि वे राज्य लोक सेवा आयोग की प्रारंभिक परीक्षा में कई बार सफल नहीं हो सके। बावजूद इसके उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार प्रयास करते हुए अंततः संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा में सफलता हासिल कर भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में पहुंचे।

39 वर्ष की उम्र में शुरू किया फिटनेस मिशन
अवनीश शरण ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2020 में कोरोना महामारी के दौरान, 39 वर्ष की आयु में अपनी फिटनेस यात्रा शुरू की। शुरुआत में उत्साह तो था, लेकिन प्रशासनिक जिम्मेदारियों, पारिवारिक दायित्वों और व्यस्त दिनचर्या के कारण नियमित रूप से व्यायाम करना चुनौतीपूर्ण रहा। हालांकि उन्होंने धीरे-धीरे अनुशासित दिनचर्या अपनाई और लगातार मेहनत के दम पर अपने शरीर में उल्लेखनीय बदलाव लाने में सफलता हासिल की। आज उनकी फिटनेस कई लोगों के लिए प्रेरणा बन चुकी है।

सोशल मीडिया पर मिल रही सराहना
आईएएस अवनीश शरण अक्सर सोशल मीडिया पर अपने अनुभव, प्रेरणादायक विचार और फिटनेस से जुड़ी तस्वीरें साझा करते रहते हैं। उनके हालिया बॉडी ट्रांसफॉर्मेशन को लेकर लोग उनकी जमकर सराहना कर रहे हैं। कई यूजर्स का कहना है कि उनका यह बदलाव इस बात का उदाहरण है कि उम्र कभी भी नई शुरुआत करने में बाधा नहीं बनती।
उन्होंने बताया कि,2020 में, 39 साल की उम्र में, मैंने एक आसान लक्ष्य के साथ अपनी फिटनेस यात्रा (कोविड के बाद) शुरू की हेल्दी और फिट बनना। बहुत से लोगों की तरह, मैंने भी जोश के साथ शुरुआत की, लेकिन रेगुलर बने रहना मुश्किल था। काम की जिम्मेदारियां, परिवार की जिम्मेदारियां और ज़िंदगी की अनिश्चितताओं की वजह से अक्सर मेरे रूटीन में रुकावट आती थी। आखिरकार, 2024 में मेरी सर्जरी हुई, जिसकी वजह से मुझे काफी समय तक ट्रेनिंग रोकनी पड़ी। जून 2025 में एक बिल्कुल नए अध्याय की शुरुआत हुई। इस बार, मैं तेज़ी से वज़न घटाने या कुछ समय के मोटिवेशन के पीछे नहीं भाग रहा था। मैंने रेगुलरिटी, सब्र और डिसिप्लिन बनाए रखने का पक्का इरादा किया। मेरी सोच आसान थी: स्मार्ट तरीके से ट्रेनिंग करो। स्मार्ट तरीके से खाओ। अच्छी नींद लो। हर दिन यही दोहराओ। मैंने रैंडम वर्कआउट या क्रैश डाइट के बजाय एक सही प्लान को फॉलो किया।

1 जनवरी 2026 को, मैंने अपने लिए एक खास लक्ष्य तय किया। मैं अपनी बेटी वेदिका के जन्मदिन (27 जून) से पहले अपनी बेस्ट फ़िज़िक पाना चाहता था। मेरी पत्नी रुद्राणी ने पक्का किया कि मैं अपना लक्ष्य हासिल कर सकूं। एक साफ़ डेडलाइन होने से हर फ़ैसला लेना आसान हो गया। हर वर्कआउट मायने रखता था। हर मील मायने रखती थी। हर सुबह वज़न चेक करना मायने रखता था। शॉर्टकट खोजने के बजाय, मैंने बेसिक चीज़ों को लगातार करने पर ध्यान दिया।
हालांकि, सबसे बड़ा बदलाव अभी बाकी था; ब्लड रिपोर्ट: सितंबर 2025 और मई 2026 के बीच, मेरे लिपिड प्रोफ़ाइल में बहुत बड़ा बदलाव आया। ये नतीजे दिखाते हैं कि दिल की बीमारियों का खतरा काफी कम हो गया है। मेटाबॉलिक हेल्थ बेहतर हुई है। कोलेस्ट्रॉल का बैलेंस सुधरा है। लंबे समय के लिए सेहत की संभावनाएं बेहतर हुई हैं। इससे पता चलता है कि जीवनशैली में बदलाव से साफ़ तौर पर सुधार हो सकता है।

IAS Awanish Sharan: पीछे मुड़कर देखने पर, मुझे वज़न कम करना अपनी सबसे बड़ी कामयाबी नहीं लगती। सबसे बड़ी कामयाबी यह है कि 39 साल की उम्र के मुकाबले 45 साल की उम्र में मैं ज़्यादा सेहतमंद हूं। इस सफ़र ने मुझे सिखाया कि मोटिवेशन से ज़्यादा ताकतवर अनुशासन है, परफ़ेक्शन से ज़्यादा कीमती निरंतरता है, और सेहत ही सबसे बड़ा निवेश है जो हम कर सकते हैं।




