Plastic Currency Notes: अब कागजी नहीं प्लास्टिक के नोट होंगे आपकी जेब में, RBI का बड़ा ऐलान, बदले जाएंगे 10 और 20 रुपए के नोट
नई दिल्ली। Plastic Currency Notes: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) देश में पॉलिमर (प्लास्टिक आधारित) करेंसी नोटों के परीक्षण की दिशा में आगे बढ़ रहा है। सूत्रों के मुताबिक, शुरुआती चरण में 10 रुपये और 20 रुपये के नोटों पर पायलट प्रोजेक्ट शुरू किए जाने की संभावना है। यदि परीक्षण सफल रहता है, तो भविष्य में इन नोटों को बड़े स्तर पर चलन में लाया जा सकता है।
वैश्विक कंपनियों से मांगे गए आवेदन
इस परियोजना के लिए आरबीआई की नोट छापने वाली इकाई भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड (BRBNMPL) ने दुनिया भर की कंपनियों से रुचि पत्र (Expression of Interest) आमंत्रित किए हैं। इसका उद्देश्य सुरक्षा फीचर्स वाले विशेष पॉलिमर सब्सट्रेट की आपूर्ति सुनिश्चित करना है, जिस पर भारतीय करेंसी की छपाई की जाएगी।
अत्याधुनिक सुरक्षा फीचर्स होंगे शामिल
प्रस्तावित पॉलिमर नोटों में नकली नोटों पर रोक लगाने के लिए कई उन्नत सुरक्षा विशेषताएं शामिल की जाएंगी। इनमें पारदर्शी विंडो, पोर्ट्रेट फीचर, मेटैलिक नंबर, चुंबकीय सुरक्षा धागा, छाया चित्र (शैडो इमेज) और इंद्रधनुषी पैटर्न जैसे फीचर्स शामिल हो सकते हैं। इन नोटों की छपाई BRBNMPL और सिक्योरिटी प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (SPMCIL) की प्रेस में की जाएगी।
पायलट प्रोजेक्ट की सफलता पर होगा फैसला
सूत्रों के अनुसार, आरबीआई पहले सीमित स्तर पर इन नोटों का फील्ड ट्रायल करेगा। परीक्षण के दौरान नोटों की मजबूती, सुरक्षा और उपयोगिता का आकलन किया जाएगा। यदि परिणाम संतोषजनक रहे, तो वर्ष 2027 से इन्हें व्यापक स्तर पर जारी करने पर विचार किया जा सकता है।
टेंडर में सुरक्षा को प्राथमिकता
इस परियोजना के लिए जारी वैश्विक टेंडर में कड़े सुरक्षा मानदंड निर्धारित किए गए हैं। बोली लगाने वाली कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि परियोजना से जुड़ा कोई भी कार्य चीन या पाकिस्तान से संचालित न हो। साथ ही इन देशों से कच्चा माल लेने या वहां कार्य कर चुके कर्मियों को इस परियोजना में शामिल करने पर भी प्रतिबंध रहेगा।
इसके अलावा, भारत की सीमा साझा करने वाले देशों की कंपनियों के लिए आवश्यक सरकारी पंजीकरण अनिवार्य होगा। इच्छुक कंपनियों को केंद्रीय बैंक या नोट प्रिंटिंग संस्थानों को सुरक्षा युक्त पॉलिमर सामग्री की आपूर्ति का कम से कम तीन वर्ष का अनुभव भी होना चाहिए।
आरबीआई ने नहीं की आधिकारिक घोषणा
हालांकि, आरबीआई ने अब तक आधिकारिक तौर पर यह पुष्टि नहीं की है कि पायलट प्रोजेक्ट किन मूल्यवर्ग के नोटों पर शुरू होगा। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा पहले संकेत दे चुके हैं कि पॉलिमर नोटों का प्रस्ताव विचाराधीन है और अंतिम निर्णय से पहले उनकी सुरक्षा, टिकाऊपन और व्यवहारिकता का विस्तृत मूल्यांकन किया जा रहा है।
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क्यों खास हैं पॉलिमर नोट?
Plastic Currency Notes: पॉलिमर नोट पहली बार 1988 में ऑस्ट्रेलिया में जारी किए गए थे। वर्तमान में दुनिया के 50 से अधिक देशों में इनका इस्तेमाल हो रहा है। पारंपरिक कागजी नोटों की तुलना में ये अधिक मजबूत, लंबे समय तक टिकाऊ और नकली बनाना कठिन माने जाते हैं। यही वजह है कि लंबे समय में इनकी छपाई और रखरखाव की लागत भी कम हो सकती है।



