CG Assembly Session 2026: राम मंदिर चंदा चोरी मामले में छत्तीसगढ़ विधानसभा में विपक्ष का हंगामा, सदन की कार्यवाही स्थगित
रायपुर। CG Assembly Session 2026: छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन शून्यकाल के दौरान अयोध्या राम मंदिर में कथित चंदा चोरी के मामले को लेकर सदन में जोरदार हंगामा देखने को मिला। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने इस मुद्दे पर स्थगन प्रस्ताव लाते हुए चर्चा कराने की मांग की, जिस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस छिड़ गई।
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स्थगन प्रस्ताव पेश करते हुए डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि, मामला गंभीर है और इस पर सदन में विस्तृत चर्चा होनी चाहिए। विपक्ष ने इसे जनहित और सार्वजनिक आस्था से जुड़ा विषय बताते हुए सरकार से जवाब मांगा। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि यह केवल आर्थिक अनियमितता का मामला नहीं, बल्कि करोड़ों राम भक्तों की आस्था से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि “करीब 3 करोड़ राम भक्तों की आस्था के साथ खिलवाड़ हुआ है, इसलिए इस गंभीर मामले पर सदन में चर्चा होनी चाहिए।”
इस दौरान सत्ता पक्ष के वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर ने स्थगन प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा कि, यह छत्तीसगढ़ विधानसभा के अधिकार क्षेत्र का विषय नहीं है। उन्होंने कहा, “हमें किसी भी विषय पर चर्चा करने में कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन चर्चा विधानसभा की प्रक्रिया और नियमों के तहत होनी चाहिए।” विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि, विधानसभा का नहीं विषय किसी भी विषय मे किसी को भी बोलने का अधिकार नहीं है।
अजय चंद्राकर के बयान पर विपक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई। विपक्षी सदस्यों ने आरोप लगाया कि, जब सत्ता पक्ष कोई मुद्दा उठाता है तो उस पर चर्चा कराई जाती है, लेकिन विपक्ष के मुद्दों पर लगातार व्यवधान पैदा किया जाता है। इसे लेकर दोनों पक्षों के बीच जमकर नोकझोंक और बहस हुई।
इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने विपक्ष का पक्ष रखते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ के लोगों ने भी राम मंदिर निर्माण के लिए चंदा दिया है। इसलिए यह प्रदेश के लोगों की भावना और हितों से जुड़ा मामला है और इस पर विधानसभा में चर्चा होनी चाहिए।
CG Assembly Session 2026: सदन में बढ़ते शोर-शराबे के बीच विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस विषय पर स्थगन प्रस्ताव लाया गया है, वह राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र का विषय नहीं है, इसलिए विधानसभा के नियमों के अनुसार उस पर स्थगन प्रस्ताव के जरिए चर्चा नहीं कराई जा सकती। अध्यक्ष के फैसले के बाद विपक्ष ने अपनी नाराजगी जताई, जबकि सत्ता पक्ष ने अध्यक्ष के निर्णय का समर्थन किया। अध्यक्ष के फैसले के बाद सदन में कुछ देर तक पक्ष-विपक्ष के बीच नोकझोंक होती रही, जिसके बाद कार्यवाही आगे बढ़ाई गई।




