Bengaluru Triple Murder: AI से लिखी थी हत्या की कहानी…बेंगलुरु ट्रिपल मर्डर केस हैरान कर देने वाला खुलासा, युवती ने मां-बाप और बहन की थी हत्या
बेंगलुरु। Bengaluru Triple Murder: कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में हुए चर्चित ट्रिपल मर्डर केस ने जांच एजेंसियों के सामने एक नया सवाल खड़ा कर दिया है—क्या किसी जघन्य अपराध की योजना बनाने में इस्तेमाल हुई तकनीक की भूमिका भी जांच का हिस्सा बन सकती है? इस मामले में पुलिस का कहना है कि आरोपी दंपति ने कथित तौर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित टूल्स का उपयोग हत्या की योजना तैयार करने और डिजिटल जानकारी जुटाने के लिए किया था। हालांकि, AI को किसी मामले में कानूनी रूप से आरोपी बनाए जाने की पुष्टि नहीं हुई है, और जांच फिलहाल मानव आरोपियों की भूमिका पर केंद्रित है।
पुलिस के अनुसार, 24 वर्षीय श्वेता और उसका 25 वर्षीय लिव-इन पार्टनर केनेथ इस मामले के मुख्य आरोपी हैं। आरोप है कि दोनों ने श्वेता की मां, पिता और छोटी बहन की हत्या की साजिश कई महीनों पहले रची थी। वारदात के पीछे आर्थिक विवाद और पारिवारिक तनाव को शुरुआती जांच में संभावित कारण माना जा रहा है। जांच में सामने आया कि दोनों आरोपी लंबे समय तक इंटरनेट और AI आधारित चैट टूल्स पर हत्या की योजना, सबूत छिपाने के तरीके और पुलिस जांच से बचने संबंधी जानकारी तलाशते रहे। पुलिस ने उनके लैपटॉप और अन्य डिजिटल उपकरणों की फोरेंसिक जांच में कथित सर्च हिस्ट्री और चैट रिकॉर्ड बरामद किए हैं, जिन्हें अब साक्ष्य के रूप में परखा जा रहा है।
घटना 22 जून की बताई जा रही है। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने पहले श्वेता की मां को फ्लैट में बुलाया और उन पर धारदार हथियार से हमला किया। इसके बाद पिता और छोटी बहन को भी वहां बुलाकर उन पर हमला किया गया। वारदात के बाद दोनों आरोपी मौके से फरार हो गए। हालांकि, घायल पिता गंभीर अवस्था में घर से बाहर निकलने में सफल रहे और पुलिस को घटना की जानकारी दी। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां बाद में उनकी भी मौत हो गई। पुलिस ने उनकी ओर से दिए गए शुरुआती बयान को जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा माना है।
Bengaluru Triple Murder: वारदात के बाद दोनों आरोपी पुडुचेरी चले गए थे, जहां से पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर बेंगलुरु लाया। पूछताछ और डिजिटल फोरेंसिक जांच के आधार पर पुलिस पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ रही है। जांच अधिकारियों का कहना है कि यह मामला तकनीक के अपराध में संभावित उपयोग को लेकर भी महत्वपूर्ण है। हालांकि, भारतीय कानून के तहत आपराधिक जिम्मेदारी इंसानों की होती है, इसलिए फिलहाल कार्रवाई आरोपियों के खिलाफ ही की जा रही है। AI टूल्स के कथित उपयोग की भूमिका को जांच के साक्ष्यों के रूप में परखा जा रहा है और संबंधित तकनीकी जानकारी भी जुटाई जा रही है।




