Big Breaking:देश-दुनिया में पंडवानी को पहचान दिलाने वाली डॉ.तीजन बाई का निधन
प्रविंस मनहर/रायपुर- छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को देश-दुनिया में नई पहचान दिलाने वाली प्रसिद्ध पंडवानी गायिका पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई का रविवार को रायपुर के एम्स अस्पताल में निधन हो गया। वह 72 वर्ष, 2 महीने और 11 दिन की थीं। लंबे समय से गंभीर बीमारियों से जूझ रही डॉ. तीजन बाई के निधन से प्रदेश ही नहीं, पूरे देश के कला और सांस्कृतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।
24 अप्रैल 1956 को दुर्ग जिले के गनियारी गांव में जन्मीं डॉ. तीजन बाई पारधी अनुसूचित जनजाति से संबंध रखती थीं। उनके पिता का नाम हुकुमचंद परधा और माता का नाम सुखवाती बाई था। बचपन में अपने नाना ब्रजलाल पारधी से महाभारत की कथाएं सुनते-सुनते उन्होंने पंडवानी गायन की अद्भुत कला आत्मसात कर ली। बाद में उन्होंने उमेद सिंह देशमुख से पंडवानी का अनौपचारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया।
डॉ. तीजन बाई ने अपनी सशक्त प्रस्तुति और अनूठी शैली से पंडवानी को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाया। उन्होंने देश-विदेश में छत्तीसगढ़ की लोककला का परचम लहराया और अपनी कला से करोड़ों लोगों का दिल जीता। उनके योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री, पद्म भूषण और देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया था। उनके निधन से छत्तीसगढ़ ने अपनी सांस्कृतिक विरासत की एक अमूल्य धरोहर खो दी है।




