UP Flood 2026: बाढ़ की चपेट में यूपी के 23 जिले, 16 हजार से ज्यादा लोगों का रेस्क्यू, जन-जीवन प्रभावित
लखनऊ। UP Flood 2026: उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में बाढ़ का संकट अभी पूरी तरह टला नहीं है। प्रदेश के 35 प्रभावित जिलों में से 23 जिले फिलहाल बाढ़ से जूझ रहे हैं। प्रशासन की ओर से लगातार राहत और बचाव अभियान चलाया जा रहा है। अब तक 16,784 लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा चुका है, जिसमें अकेले बुधवार को 3,042 लोगों का रेस्क्यू किया गया। बारिश और बाढ़ से जुड़ी घटनाओं में तीन लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है। इनमें प्रतापगढ़ का 18 महीने का प्रियांश, जबकि अमरोहा के गजरौला में 32 वर्षीय शेरा और 55 वर्षीय सुरेश शामिल हैं।
बड़े स्तर पर राहत-बचाव अभियान
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोगों तक मदद पहुंचाने के लिए प्रशासन ने 1,499 नाव और मोटरबोट मैदान में उतारी हैं। स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 1,067 मेडिकल टीमें भी तैनात की गई हैं। प्रशासन ने प्रभावित लोगों को सुरक्षित रखने के लिए 1,311 राहत केंद्र बनाए हैं, हालांकि इनमें से फिलहाल 201 केंद्र ही सक्रिय हैं। इसके अलावा बारिश और बाढ़ के कारण क्षतिग्रस्त हुए 442 मकानों के मामलों में भी सहायता उपलब्ध कराई गई है। बाढ़ का असर करीब 36,287 पशुओं पर भी पड़ा है।
चित्रकूट में 150 लोगों का रेस्क्यू
चित्रकूट में मंदाकिनी नदी के आसपास के इलाकों में पानी बढ़ने के बाद चौरा गांव में राहत अभियान चलाया गया। 42वीं बटालियन PAC की मोटरबोट की मदद से करीब 150 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। रेस्क्यू किए गए लोगों को भोजन, जरूरी राहत सामग्री और चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई।
बलिया में 20 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित
बलिया में गंगा और सरयू नदी के बढ़ते जलस्तर ने कई इलाकों की चिंता बढ़ा दी है। यहां करीब 20,500 लोग प्रभावित बताए गए हैं। राहत कार्य के लिए 83 नावें तैनात हैं। जिले में अब तक 6,500 राशन किट, 33,843 दवा किट और 83,092 पके भोजन के पैकेट वितरित किए गए हैं। पशुओं को संक्रमण से बचाने के लिए 16,629 पशुओं का टीकाकरण किया गया है, जबकि 965 क्विंटल चारे की व्यवस्था की गई है। बाढ़ चौकियों के साथ NDRF और PAC की टीमें भी संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात हैं। गोपालनगर टाडी और भोजपुरवा में राहत शिविरों के साथ कम्युनिटी किचन भी संचालित किए जा रहे हैं।
पीलीभीत में कई नदियों का जलस्तर बढ़ा
पीलीभीत में शारदा, देओहा और खाकरा नदियों का जलस्तर बढ़ने से हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। बनबसा से शारदा नदी में दो लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ा गया, जबकि नानक सागर से देओहा नदी में 30 हजार क्यूसेक से ज्यादा पानी छोड़े जाने की जानकारी है। स्थिति को देखते हुए कक्षा 1 से 8 तक के स्कूल बंद कर दिए गए हैं। खाकरा पुल के पानी में डूबने के कारण करीब 18 गांवों का सड़क संपर्क प्रभावित हुआ है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है।
वहीं 200 बेड वाले मेडिकल कॉलेज की बिजली व्यवस्था भी बारिश से प्रभावित हुई। अंडरग्राउंड केबल बॉक्स में पानी भर जाने के कारण मुख्य बिजली आपूर्ति 34 घंटे से अधिक समय तक बाधित रही। इस दौरान अस्पताल में जनरेटर के जरिए बिजली की व्यवस्था जारी रखी गई।
लखीमपुर खीरी में कटाव वाले क्षेत्रों का निरीक्षण
लखीमपुर खीरी में जिला मजिस्ट्रेट अंजनी कुमार सिंह ने गिरजा बैराज एफ्लक्स बांध और मोहना नदी के किनारे कटाव प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लिया। प्रशासन की टीमें लगातार मौके पर काम कर रही हैं। पानी की चपेट में आए करीब एक दर्जन घरों के लोगों को सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित किया जा रहा है।
अधिकारियों के मुताबिक पालिया में शारदा नदी का जलस्तर 154.59 मीटर के खतरे के निशान से 35 सेंटीमीटर ऊपर दर्ज किया गया और फिलहाल जलस्तर स्थिर बताया गया है। कई खेत और गांवों को जोड़ने वाली सड़कें पानी में डूबी हुई हैं। हालांकि अभी किसी गांव के पूरी तरह बाढ़ में डूबने की सूचना नहीं है।
लाखों क्लोरीन टैबलेट और ORS पैकेट वितरित
बाढ़ के साथ बीमारियों का खतरा बढ़ने को देखते हुए प्रशासन राहत सामग्री के साथ स्वास्थ्य संबंधी सामान भी वितरित कर रहा है। अब तक 68,953 खाद्यान्न पैकेट और 3.36 लाख से अधिक भोजन पैकेट बांटे जा चुके हैं। पानी से होने वाली बीमारियों पर नियंत्रण के लिए 5.02 लाख से ज्यादा क्लोरीन की गोलियां और 1.77 लाख से अधिक ORS पैकेट वितरित किए गए हैं। इससे पहले भी बड़ी मात्रा में खाद्यान्न, भोजन, क्लोरीन और ORS सामग्री प्रभावित इलाकों में पहुंचाई गई थी।
संवेदनशील इलाकों में अलर्ट, गाजियाबाद में येलो अलर्ट
UP Flood 2026: प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। लोगों को स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने और जलभराव वाले क्षेत्रों में जाने से बचने की सलाह दी गई है। वहीं गाजियाबाद में 4 सितंबर तक येलो अलर्ट जारी किया गया है। मौसम खराब होने और भारी बारिश की स्थिति में लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने तथा जलभराव वाले रास्तों से दूर रहने की सलाह दी गई है। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने, आवश्यक खाद्य एवं चिकित्सा सामग्री उपलब्ध कराने और बाढ़ के कारण बाधित संपर्क को बहाल करने पर है।




