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Coal Levy Case: कोल लेवी मामले में EOW का बड़ा खुलासा, 7 वॉट्सऐप ग्रुप से चलता था नेटवर्क, CM हाउस नाम से गेस्ट हाउस बुकिंग का दावा

रायपुर। Coal Levy Case:  रायपुर में सामने आए कथित 500 करोड़ रुपये से अधिक के कोल लेवी मामले में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने कल 5 अक्टूबर सोमवार को अदालत में करीब 9500 पन्नों का छठा पूरक चालान पेश किया। जांच एजेंसी के अनुसार, इस चालान में 12 आरोपियों की कथित भूमिका और उनसे जुड़े दस्तावेजी साक्ष्यों का विस्तृत ब्योरा शामिल है।

EOW का आरोप है कि कोयला परिवहन के दौरान प्रत्येक टन पर 25 रुपये की अवैध राशि वसूलने के लिए एक संगठित व्यवस्था बनाई गई थी। एजेंसी ने दावा किया है कि वसूली से जुटाई गई रकम का इस्तेमाल अलग-अलग राजनीतिक और निजी गतिविधियों के साथ-साथ जमीन, फ्लैट और वाशरी जैसी संपत्तियों में निवेश के लिए किया गया।

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15 जुलाई 2020 के आदेश के बाद वसूली का नेटवर्क बनने का दावा

EOW की जांच के मुताबिक, 15 जुलाई 2020 को जारी आदेश के बाद ऑनलाइन ई-परमिट जारी करने से पहले जिला खनिज अधिकारी की मंजूरी जरूरी कर दी गई थी। एजेंसी का दावा है कि इसी प्रशासनिक प्रक्रिया का कथित तौर पर इस्तेमाल कोयला कारोबारियों और परिवहनकर्ताओं से प्रति टन 25 रुपये की राशि वसूलने के लिए किया गया।

जांच के अनुसार, अलग-अलग जिलों से एकत्र की गई रकम रायपुर पहुंचती थी। यहां इसका हिसाब रखा जाता और इसके बाद तय व्यवस्था के अनुसार आगे रकम बांटी जाती थी। EOW का कहना है कि इस पूरे सिस्टम को तैयार करने और संचालित करने में करीब 5 करोड़ रुपये के लेन-देन के साक्ष्य मिले हैं। एजेंसी के अनुसार, पप्पू बंसल द्वारा रकम दिए जाने तथा निखिल चंद्राकर और नवनीत के जरिए इसे सूर्यकांत तिवारी तक पहुंचाए जाने की जानकारी भी जांच में सामने आई है।

सात वॉट्सऐप ग्रुप के जरिए संपर्क और निर्देश

जांच एजेंसी के मुताबिक, सिंडिकेट से जुड़े लोग आपसी बातचीत, वसूली और पैसों से संबंधित निर्देशों के लिए सात अलग-अलग वॉट्सऐप ग्रुप का इस्तेमाल करते थे। EOW ने जब्त किए गए मोबाइल फोन, वॉट्सऐप चैट, डायरियों और बैंक खातों में हुए लेन-देन से मिली जानकारियों को पूरक चालान का हिस्सा बनाया है। एजेंसी ने यह भी दावा किया है कि अनुराग दीवान के जब्त मोबाइल से 15 जुलाई 2020 के आदेश से जुड़े डिजिटल साक्ष्य मिले हैं। जांच के दौरान सूर्यकांत तिवारी और उसके सहयोगियों द्वारा अलग-अलग जिलों में बैठकें किए जाने की जानकारी भी सामने आने की बात कही गई है।

‘सीएम हाउस’ नाम से गेस्ट हाउस बुकिंग का दावा

EOW के अनुसार, जांच में ऐसे दस्तावेज और रिकॉर्ड मिले हैं, जिनमें सूर्यकांत तिवारी और उसके सहयोगियों के ठहरने के लिए विश्राम गृहों में ‘सीएम हाउस’ के नाम से बुकिंग कराए जाने का उल्लेख है। बालको और अंबुजा से संबंधित पत्राचार को भी जांच का हिस्सा बनाया गया है। एजेंसी के अनुसार, एक पत्राचार में परिवहन बिलों में प्रति टन 25 रुपये की राशि जोड़ने से जुड़ी जानकारी सामने आई है।

पैलेट परिवहन पर 100 रुपये प्रति टन वसूली का आरोप

जांच केवल कोयला परिवहन तक सीमित नहीं रही। EOW का दावा है कि लौह अयस्क पैलेट के परिवहन पर भी प्रति टन 100 रुपये की कथित अवैध वसूली की व्यवस्था थी। इस मामले में तत्कालीन संचालक, भौमिकी एवं खनिकर्म जयप्रकाश मौर्य की भूमिका का उल्लेख चालान में किया गया है। एजेंसी के मुताबिक, पैलेट उद्योग से जुड़े कारोबारियों की बैठक लेकर उन्हें सूर्यकांत तिवारी या उसके सहयोगियों को प्रति टन 100 रुपये देने के निर्देश दिए जाने के साक्ष्य मिले हैं। जब्त डायरियों में भी इससे संबंधित एंट्री मिलने का दावा किया गया है।

डायरियों में करोड़ों की एंट्री का जिक्र

छठे पूरक चालान में राम गोपाल अग्रवाल, देवेंद्र सिंह यादव, विनोद तिवारी, रामप्रताप सिंह, चंद्रदेव प्रसाद राय, जयप्रकाश मौर्य, पियूष कुमार साहू, जोगेन्दर सिंह, अनुराग चौरसिया, दीपेश टांक, सुनील कुमार अग्रवाल और राहुल मिश्रा की कथित भूमिका का उल्लेख किया गया है। EOW के अनुसार, राम गोपाल अग्रवाल से संबंधित जब्त डायरियों में ‘भवन’ और ‘C PARTY’ नाम से 32 एंट्री दर्ज मिलीं। इन एंट्री में करीब 104.20 करोड़ रुपये का हिसाब होने का दावा किया गया है। एजेंसी का आरोप है कि इस रकम का इस्तेमाल पार्टी से संबंधित गतिविधियों के लिए किया गया।

जमीन, फ्लैट और वाशरी में निवेश की भी जांच

EOW ने कथित लेवी से जुटाई गई रकम के निवेश को लेकर भी जांच की है। एजेंसी के मुताबिक, जमीन, फ्लैट, वाशरी और अन्य संपत्तियों में पैसे लगाए जाने से जुड़े दस्तावेज मिले हैं। पियूष कुमार साहू के संबंध में परिवार से जुड़ी संपत्तियों में रकम निवेश कराने की भूमिका की जांच की गई। वहीं अनुराग चौरसिया से जुड़े मामले में जमीन और फ्लैट की खरीद से संबंधित वित्तीय लेन-देन को जांच में शामिल किया गया है।

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जोगेन्दर सिंह से जुड़ी सात फर्मों में करीब 40 करोड़ रुपये के कथित लेन-देन का विवरण भी चालान में शामिल किए जाने की बात EOW ने कही है। इसी तरह सुनील कुमार अग्रवाल के मामले में नकदी रखने, रकम आगे पहुंचाने और वाशरी की खरीद में निवेश से जुड़े तथ्यों की जांच का दावा किया गया है। दीपेश टांक के संबंध में एजेंसी ने आरोप लगाया है कि जमीन के सौदे में रजिस्ट्री मूल्य से अधिक नकदी ली गई और बाद में उसे कृषि आय के तौर पर दिखाने का प्रयास किया गया।

पहले पेश हो चुके हैं मुख्य और पांच पूरक चालान

EOW के मुताबिक, कोल लेवी मामले में अब तक एक मुख्य चालान के अलावा पांच पूरक चालान अदालत में पेश किए जा चुके हैं। सोमवार को दाखिल करीब 9500 पन्नों के छठे पूरक चालान में जांच के दौरान जुटाए गए अतिरिक्त दस्तावेज, डिजिटल साक्ष्य और वित्तीय लेन-देन से संबंधित सामग्री को शामिल किया गया है। एजेंसी ने बताया है कि मामले में अन्य संदिग्धों और शेष वित्तीय लेन-देन की जांच अभी जारी है। यह जांच दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 173(8) के तहत आगे बढ़ाई जा रही है।

ED की जांच में विधायक और अधिकारियों के संपर्क का दावा

इसी मामले में ED की जांच से जुड़े दावों में कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव और कारोबारी सूर्यकांत तिवारी के बीच संपर्क का भी उल्लेख किया गया है। ED के अनुसार, दोनों के बीच वॉट्सऐप पर बातचीत हुई थी। चार्जशीट में कथित चैट के हवाले से खैरागढ़ चुनाव, रायपुर आने, मुलाकात के समय और इंतजार से जुड़ी बातचीत का जिक्र किया गया है।

ED के आरोपों के अनुसार, तत्कालीन मुख्यमंत्री के कार्यालय से जुड़ी अधिकारी सौम्या चौरसिया और कारोबारी सूर्यकांत तिवारी के संपर्क में IPS पारुल माथुर, प्रशांत अग्रवाल और भोजराम पटेल भी थे। एजेंसी का आरोप है कि इन अधिकारियों की ओर से विभागीय जानकारी सूर्यकांत तिवारी तक पहुंचाई गई।

ED ने यह भी आरोप लगाया है कि IPS पारुल माथुर ने कारोबारी के निर्देश पर कोयला परिवहन करने वाले वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की। वहीं कॉन्स्टेबल अमित कुमार दुबे पर ED अधिकारियों की गतिविधियों की कथित तौर पर निगरानी करने का आरोप लगाया गया है। इन आरोपों पर संबंधित पक्षों के जवाब और अदालत की आगे की कार्यवाही महत्वपूर्ण होगी।

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36 लोगों के खिलाफ FIR

Coal Levy Case:  ED की रिपोर्ट के आधार पर ACB/EOW ने दो पूर्व मंत्रियों और विधायकों समेत कुल 36 लोगों के खिलाफ नामजद FIR दर्ज की है। इसके बाद एजेंसी द्वारा मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है। मामले की पिछली कार्रवाई में IAS रानू साहू, IAS समीर विश्नोई, सौम्या चौरसिया, जेडी माइनिंग एसएस नाग और कारोबारी सूर्यकांत तिवारी समेत कई लोगों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है। अब छठे पूरक चालान के जरिए EOW ने जांच से जुड़े नए दस्तावेज और साक्ष्य अदालत के सामने रखे हैं।

 

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