Europe Heatwave: यूरोप में आसमान से बरसी आग, गर्मी से 50 हजार से ज्यादा मौतें, जलवायु परिवर्तन ने बढ़ाया खतरा
यूरोप। Europe Heatwave: यूरोप में इस साल गर्मी ने गंभीर संकट पैदा कर दिया। भीषण तापमान के कारण जून, जुलाई और अगस्त के दौरान 50 हजार से ज्यादा लोगों की मौत होने का अनुमान लगाया गया है। एक नए अध्ययन के मुताबिक, इनमें से लगभग 32,619 मौतें मानवीय गतिविधियों के कारण बढ़े तापमान से जुड़ी थीं। कोयला, तेल और गैस जैसे जीवाश्म ईंधन जलाने से होने वाला जलवायु परिवर्तन गर्मी के असर को और घातक बना रहा है। शोधकर्ताओं के अनुसार, इस साल गर्मी से हुई मौतों का अनुमानित आंकड़ा वर्ष 2022 की गर्मियों में दर्ज 29,480 मौतों से करीब 71 प्रतिशत अधिक है। इससे यूरोप में बढ़ते तापमान और उससे जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों को लेकर चिंता बढ़ गई है।
854 शहरों के आंकड़ों से सामने आई गंभीर तस्वीर
‘नेचर हेल्थ’ पत्रिका में प्रकाशित होने वाले इस अध्ययन में यूरोप के 854 शहरों में गर्मी से होने वाली मौतों का आकलन किया गया। शोध के मुताबिक, तीन महीनों के दौरान कुल 50,391 मौतें गर्मी से जुड़ी थीं। इनमें से 32,619 मौतों को मानवीय गतिविधियों से प्रेरित जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ी अतिरिक्त गर्मी से संबंधित बताया गया।
हालांकि, शोधकर्ताओं का मानना है कि वास्तविक संख्या इससे अधिक हो सकती है। अध्ययन में मई के दौरान पड़ी भीषण गर्मी और चयनित 854 शहरों से बाहर हुई मौतों को शामिल नहीं किया गया। इन शहरों में यूरोप की लगभग 40 प्रतिशत आबादी रहती है।
बुजुर्गों पर सबसे ज्यादा असर, युवा भी नहीं रहे सुरक्षित
अध्ययन में उम्र के आधार पर गर्मी के प्रभाव का भी विश्लेषण किया गया। आंकड़ों के मुताबिक, 85 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोगों की मौतें कुल अनुमानित मौतों के आधे से ज्यादा थीं। इससे स्पष्ट होता है कि अधिक उम्र के लोग भीषण गर्मी के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील हैं।
लेकिन गर्मी का खतरा केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रहा। रिपोर्ट के अनुसार, 20 से 44 वर्ष की उम्र के 800 से ज्यादा लोगों की भी गर्मी से मौत हुई। यानी कम उम्र के लोगों के लिए भी अत्यधिक तापमान गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकता है। इटली, फ्रांस, स्पेन और जर्मनी में गर्मी से सबसे ज्यादा मौतें दर्ज किए जाने की जानकारी अध्ययन में सामने आई है।
जलवायु परिवर्तन ने बढ़ाई गर्मी की तीव्रता
इम्पीरियल कॉलेज लंदन की जलवायु वैज्ञानिक क्लेयर बार्न्स के मुताबिक, पश्चिमी और उत्तरी यूरोप का बुनियादी ढांचा मौजूदा तापमान की चुनौतियों से निपटने के लिए पर्याप्त रूप से तैयार नहीं है। उनके अनुसार, इस बार प्राकृतिक परिस्थितियों के कारण भी असामान्य गर्मी पड़ी, लेकिन पहले से जारी जलवायु परिवर्तन ने तापमान को और बढ़ाकर हालात अधिक गंभीर बना दिए। यानी, जलवायु परिवर्तन के बिना भी गर्मी असामान्य हो सकती थी, लेकिन उसके प्रभाव ने इस संकट को ज्यादा घातक बना दिया। अध्ययन में बताया गया है कि औद्योगिक काल से पहले के स्तर की तुलना में यूरोप का औसत तापमान लगभग 2.5 डिग्री सेल्सियस बढ़ चुका है। आर्कटिक क्षेत्र में तापमान बढ़ने की रफ्तार इससे भी तेज बताई गई है।
गर्मी से बचाव के लिए समय रहते तैयारी जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि भीषण गर्मी से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए केवल तापमान पर नजर रखना पर्याप्त नहीं है। स्वास्थ्य सेवाओं, शहरी सुविधाओं और आपदा प्रबंधन प्रणालियों को भी इसके अनुरूप तैयार करना होगा।
कनाडा की आपात चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. कोर्टनी हॉवर्ड ने गर्मी से निपटने के लिए कई महत्वपूर्ण कदमों पर जोर दिया है:
- पूर्व चेतावनी प्रणाली: भीषण गर्मी आने से पहले लोगों को समय रहते सचेत किया जाए।
- सुलभ शीतलन सुविधाएं: कम कार्बन उत्सर्जन वाले कूलिंग सिस्टम और ठंडे स्थानों तक सभी की पहुंच सुनिश्चित हो।
- कमजोर लोगों की देखभाल: बुजुर्गों और अधिक जोखिम वाले लोगों की नियमित निगरानी के लिए स्थानीय स्तर पर व्यवस्था बनाई जाए।
- जीवाश्म ईंधन में कमी: कोयला, तेल और गैस के इस्तेमाल को तेजी से कम कर ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन घटाया जाए।
गर्मी अब केवल मौसम नहीं, स्वास्थ्य का बड़ा संकट
Europe Heatwave: यूरोप में गर्मी से जुड़ी मौतों के ये अनुमान बताते हैं कि बढ़ता तापमान अब केवल मौसमी परेशानी नहीं रह गया है। इसका सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य और जीवन पर पड़ रहा है। खासकर बुजुर्गों और पहले से जोखिम में रहने वाले लोगों के लिए समय पर चेतावनी, सुरक्षित वातावरण और स्वास्थ्य सेवाएं बेहद जरूरी हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, भविष्य में गर्मी से होने वाले नुकसान को सीमित करने के लिए तत्काल तैयारी के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन को बढ़ाने वाले उत्सर्जन में कमी लाना भी महत्वपूर्ण होगा।




