Shardiya Navratri 2026: इस नवरात्रि क्या होगी मां दुर्गा की सवारी, देश-दुनिया में क्या होगा आगमन का असर
रविवार से नवरात्रि की शुरुआत, हाथी पर होगा देवी का आगमन
इस वर्ष शारदीय नवरात्रि की शुरुआत रविवार को हो रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब नवरात्रि का आरंभ रविवार या सोमवार से होता है, तो मां दुर्गा के आगमन का वाहन हाथी माना जाता है। भारतीय धार्मिक परंपराओं में हाथी को शक्ति, स्थिरता, ऐश्वर्य और समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है।
हाथी पर आगमन को क्यों माना जाता है शुभ?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां दुर्गा का हाथी पर आगमन वर्षा और कृषि के लिहाज से शुभ संकेत माना जाता है। इसे अच्छी बारिश और बेहतर फसल से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता यह भी है कि माता के हाथी पर आने से वातावरण में सकारात्मकता और शांति बढ़ती है। श्रद्धालु इसे देवी की कृपा, सुख-समृद्धि और जनकल्याण से जोड़कर देखते हैं। हालांकि, ये सभी बातें धार्मिक परंपराओं और मान्यताओं पर आधारित हैं, इनका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है।
देश-दुनिया में शांति और स्थिरता की मान्यता
देवी के हाथी पर आगमन को लेकर कुछ धार्मिक मान्यताओं में देश और दुनिया में शांति एवं स्थिरता आने की भी बात कही गई है। माना जाता है कि इससे तनावपूर्ण परिस्थितियों में कमी आ सकती है और विभिन्न पक्षों के बीच संवाद का रास्ता खुल सकता है। सामाजिक स्तर पर भी इसे आपसी भाईचारे, सौहार्द और शांति का प्रतीक माना जाता है। हालांकि, इन मान्यताओं को धार्मिक विश्वास के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
आर्थिक समृद्धि से भी जोड़ा जाता है हाथी का वाहन
हाथी को वैभव और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इसी वजह से देवी के हाथी पर आगमन को आर्थिक दृष्टि से भी शुभ संकेत मानने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान लोगों के जीवन में आर्थिक स्थिरता आने, रोजगार के अवसर बढ़ने और कारोबार में सुधार होने की उम्मीद की जाती है। कुछ ज्योतिषीय व्याख्याओं में शेयर बाजार और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों में सकारात्मक परिस्थितियों की संभावना से भी इसे जोड़ा जाता है। हालांकि, बाजार की वास्तविक दिशा कई आर्थिक और वैश्विक परिस्थितियों पर निर्भर करती है।
कब होगी मां दुर्गा की विदाई?
शारदीय नवरात्रि के समापन के बाद 20 अक्टूबर 2026, मंगलवार को विजयादशमी यानी दशहरा मनाया जाएगा। धार्मिक परंपराओं में देवी के प्रस्थान का वाहन भी विजयादशमी के दिन के आधार पर निर्धारित किए जाने की मान्यता है। इस बार दशहरा मंगलवार को पड़ रहा है। मान्यता के अनुसार मंगलवार या शनिवार को देवी का प्रस्थान चरणायुध यानी मुर्गे/कुक्कुट पर माना जाता है।
मुर्गे पर विदाई को लेकर क्या है मान्यता?
धार्मिक परंपराओं में देवी के मुर्गे पर प्रस्थान को हाथी के आगमन की तुलना में कम शुभ माना जाता है। इसे चुनौतियों, चिंता और सामाजिक स्तर पर अस्थिर परिस्थितियों से जोड़ने वाली मान्यताएं भी प्रचलित हैं। हालांकि, देवी के वाहन से जुड़ी ये धारणाएं अलग-अलग धार्मिक परंपराओं और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं। इन्हें निश्चित भविष्यवाणी के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
नौ दिनों तक होगी मां के नौ स्वरूपों की पूजा
Shardiya Navratri 2026: शारदीय नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना की जाती है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार उपवास रखते हैं और मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। नवरात्रि के दौरान देशभर में देवी मंदिरों को सजाया जाता है और जगह-जगह गरबा, डांडिया तथा धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं। दसवें दिन विजयादशमी के साथ नवरात्रि पर्व का समापन होता है।



