SIR Controversy: SIR पर सियासी घमासान, प्रदर्शनकारियों ने लगाए ‘ज्ञानेश हटाओ, लोकतंत्र बचाओ’ के नारे, तेजस्वी यादव समेत कई नेता हिरासत में
पटना। SIR Controversy: बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महागठबंधन ने गुरुवार को पटना में विरोध मार्च निकाला। आरजेडी नेता तेजस्वी यादव की अगुवाई में विपक्षी दलों के नेता और कार्यकर्ता राजभवन की ओर बढ़े। प्रदर्शनकारियों ने चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और SIR को लेकर अपनी आपत्तियों के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की मांग उठाई। प्रदर्शन को देखते हुए पटना में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। मार्च के दौरान पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने की कोशिश की। इसी दौरान तेजस्वी यादव बैरिकेडिंग के ऊपर चढ़ गए। बाद में पुलिस ने तेजस्वी यादव, वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी और आरजेडी सांसद मीसा भारती समेत कई नेताओं को हिरासत में लिया।
SIR को लेकर विपक्ष का विरोध
महागठबंधन लगातार SIR की प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है। विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया में वास्तविक मतदाताओं के नाम प्रभावित होने की आशंका है। इसी मुद्दे को लेकर गठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR से जुड़े सवालों का जवाब देने की मांग की है। तेजस्वी यादव समेत विपक्षी नेताओं का आरोप है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। हालांकि, ये आरोप विपक्ष की ओर से लगाए गए हैं और इन्हें लेकर चुनाव आयोग तथा भाजपा का पक्ष अलग रहा है।
पहले भी पूरे बिहार में हुआ था प्रदर्शन
राजभवन मार्च से पहले महागठबंधन ने बुधवार को भी बिहार के अलग-अलग हिस्सों में विरोध प्रदर्शन किया था। आरजेडी और उसके सहयोगी दलों की ओर से प्रखंड स्तर पर प्रदर्शन और पुतला दहन का कार्यक्रम आयोजित किया गया था। प्रदर्शनकारियों ने ‘ज्ञानेश हटाओ, लोकतंत्र बचाओ’ और ‘वोट चोर गद्दी छोड़’ जैसे नारे लगाए थे। महागठबंधन की ओर से इस आंदोलन को SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े मुद्दों पर दबाव बनाने के अभियान के तौर पर आगे बढ़ाया जा रहा है।
विधानसभा से राजभवन तक मार्च
गुरुवार को पटना में महागठबंधन का मार्च निर्धारित कार्यक्रम के तहत आगे बढ़ा। इसमें आरजेडी, कांग्रेस, वीआईपी और वाम दलों से जुड़े नेता एवं कार्यकर्ता शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने राजभवन पहुंचकर राज्यपाल को ज्ञापन सौंपने और SIR, मतदाता सूची तथा चुनाव आयोग से जुड़े अपने मुद्दे रखने की बात कही थी। मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कई जगह तनाव की स्थिति भी बनी। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए पुलिस ने अलग-अलग स्थानों पर बैरिकेडिंग की थी।
पुतला दहन और नारेबाजी से गरमाया माहौल
महागठबंधन के आंदोलन के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारेबाजी भी हुई। इससे पहले बुधवार को राज्य के विभिन्न प्रखंड मुख्यालयों पर प्रदर्शन के दौरान ज्ञानेश कुमार सहित अन्य नामों के पुतले भी जलाए गए थे। विपक्षी दल SIR को लेकर लगातार अपनी मांगें उठा रहे हैं और इसे चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता से जोड़कर देख रहे हैं। दूसरी ओर, इस पूरे राजनीतिक विवाद के बीच चुनाव आयोग की भूमिका और मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर बहस लगातार तेज होती जा रही है।
जिला मुख्यालयों तक पहुंचा आंदोलन
SIR Controversy: महागठबंधन ने पटना के अलावा जिला स्तर पर भी विरोध कार्यक्रम आयोजित करने का ऐलान किया था। बुधवार को प्रखंड स्तर पर प्रदर्शन के बाद गुरुवार को जिला मुख्यालयों पर धरना-प्रदर्शन और पटना में राजभवन मार्च का कार्यक्रम रखा गया। बिहार में SIR को लेकर शुरू हुआ यह राजनीतिक आंदोलन अब लगातार व्यापक रूप ले रहा है। मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे से लेकर मतदाता सूची के पुनरीक्षण तक कई मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव आगे भी जारी रहने के आसार हैं।




