Durg Rice Mill: राइस मिल में बड़ा खेल! 23 हजार क्विंटल धान गायब, 23,068 क्विंटल कम मिला धान का स्टॉक
दुर्ग। Durg Rice Mill: दुर्ग जिले में कस्टम मिलिंग के तहत शासकीय धान की मिलिंग और चावल जमा करने के मामले में बड़ा स्टॉक अंतर सामने आया है। खाद्य विभाग की जांच के दौरान गुरुदेव राइस मिल में 23,068 क्विंटल धान का स्टॉक कम पाया गया। मामले में विभाग ने जांच के बाद प्रकरण कलेक्टर न्यायालय में पेश किया है।
31,514 क्विंटल धान का हुआ था उठाव
जानकारी के मुताबिक, गुरुदेव राइस मिल को कस्टम मिलिंग के लिए शासन की ओर से 31,514 क्विंटल धान उपलब्ध कराया गया था। मिलिंग के बाद निर्धारित मात्रा में चावल शासन के पास जमा किया जाना था। रिकॉर्ड के अनुसार मिल को कुल 21,215 क्विंटल चावल शासन के खाते में जमा करना था। लेकिन जांच के दौरान अब तक महज 1,739 क्विंटल चावल ही जमा पाया गया। इस हिसाब से करीब 19,475 क्विंटल चावल अभी शासन को मिल से प्राप्त होना बाकी है।
जांच में स्टॉक को लेकर सामने आई गड़बड़ी
खाद्य विभाग की टीम ने मिल में उपलब्ध स्टॉक और संबंधित दस्तावेजों की जांच की। इस दौरान धान के भौतिक स्टॉक और रिकॉर्ड में बड़ा अंतर सामने आया। जांच में 23,068 क्विंटल धान का स्टॉक कम पाया गया। विभागीय जांच के दौरान मिल प्रबंधन से संबंधित रिकॉर्ड भी मांगे गए थे। बताया गया है कि जांच के समय बी-1 स्टॉक पंजी प्रस्तुत नहीं की गई। इसके अलावा मासिक विवरणी भी जांच टीम के सामने उपलब्ध नहीं कराई गई। ऐसे में विभाग ने कस्टम मिलिंग से जुड़े स्टॉक और चावल जमा करने की स्थिति को गंभीरता से लिया है।
चावल जमा नहीं हुआ तो बैंक गारंटी से होगी वसूली
मामले में अब प्रशासनिक कार्रवाई आगे बढ़ाई जा रही है। प्रकरण कलेक्टर न्यायालय में पेश किया गया है। प्रशासन की ओर से निर्धारित मात्रा में चावल जमा कराने की प्रक्रिया पर नजर रखी जा रही है। यदि मिल प्रबंधन द्वारा शासन को बकाया चावल जमा नहीं कराया जाता है, तो नियमानुसार बैंक गारंटी के जरिए राशि की वसूली की कार्रवाई की जा सकती है। इस मामले में अंतिम कार्रवाई संबंधित न्यायिक एवं प्रशासनिक प्रक्रिया के आधार पर होगी।
कस्टम मिलिंग व्यवस्था पर भी उठे सवाल
Durg Rice Mill: कस्टम मिलिंग के तहत शासन किसानों से खरीदे गए धान को मिलर्स को मिलिंग के लिए उपलब्ध कराता है। मिलिंग के बाद निर्धारित अनुपात के अनुसार चावल शासन को वापस जमा कराया जाता है। दुर्ग की इस राइस मिल में स्टॉक और जमा चावल के बीच सामने आए बड़े अंतर के बाद अब जांच की प्रक्रिया महत्वपूर्ण हो गई है। विभागीय दस्तावेजों, भौतिक स्टॉक और शासन को जमा किए गए चावल के रिकॉर्ड के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। फिलहाल मामला कलेक्टर न्यायालय में पहुंच चुका है और बकाया चावल की वसूली तथा बैंक गारंटी से संबंधित कार्रवाई पर सबकी नजर बनी हुई है।



