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महिला आरक्षण पर विस में भिड़े Lata Usendi और Sangeeta Sinha

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में महिला आरक्षण को लेकर उस समय माहौल गरमा गया जब Lata Usendi और Sangeeta chouhan के बीच तीखी बहस देखने को मिली। दोनों नेताओं ने अपने-अपने पक्ष को मजबूती से रखते हुए सदन में राजनीतिक और सामाजिक तर्कों की झड़ी लगा दी।

विधानसभा की कार्यवाही के दौरान महिला आरक्षण के मुद्दे पर चर्चा शुरू होते ही माहौल गंभीर हो गया। लता उसेंडी ने अपने वक्तव्य में कहा कि महिलाओं को राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर समान अवसर देना समय की मांग है। उन्होंने यह भी जोर दिया कि आरक्षण केवल संख्या बढ़ाने का माध्यम नहीं, बल्कि महिलाओं को निर्णय लेने की प्रक्रिया में सशक्त भागीदारी देने का एक महत्वपूर्ण कदम है।

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दूसरी ओर, संगीता चौहान ने इस विषय पर अलग दृष्टिकोण रखते हुए कहा कि केवल आरक्षण से महिलाओं की वास्तविक स्थिति में बदलाव नहीं आएगा। उन्होंने तर्क दिया कि शिक्षा, आत्मनिर्भरता और सामाजिक सोच में बदलाव ज्यादा जरूरी है। उनके अनुसार, बिना इन आधारों को मजबूत किए आरक्षण का लाभ सीमित वर्ग तक ही सिमट सकता है।

बहस के दौरान दोनों नेताओं के बीच कई बार तीखी नोकझोंक भी हुई, जिससे सदन का माहौल कुछ समय के लिए तनावपूर्ण हो गया। हालांकि, स्पीकर के हस्तक्षेप के बाद स्थिति सामान्य हुई और चर्चा आगे बढ़ी।

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यह पूरा घटनाक्रम इस बात को दर्शाता है कि महिला आरक्षण केवल एक राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव से जुड़ा एक बड़ा विषय है। जहां एक पक्ष इसे महिलाओं के अधिकारों की दिशा में जरूरी कदम मानता है, वहीं दूसरा पक्ष इसे अधूरा समाधान बताता है।

छत्तीसगढ़ विधानसभा में हुई यह बहस साफ संकेत देती है कि महिला सशक्तिकरण के रास्ते पर अभी भी कई विचारधाराएं आमने-सामने हैं, और समाधान के लिए संतुलित दृष्टिकोण अपनाना जरूरी होगा।

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