
बलरामपुर : छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के नशे में स्कूल पहुंचने की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है विकासखंड के दूरस्थ अंचल स्थित प्राथमिक शाला बंदरचूँआ से।
यहां पदस्थ प्रधान पाठक शराब के नशे में स्कूल पहुंचे, और जब मीडिया ने उनसे सवाल किया, तो उनका बेरोक-टोक जवाब था – “एक पाव ही तो पी है।” इस लापरवाही ने न केवल स्कूल प्रशासन बल्कि शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
“आदिवासी हूं, इसलिए पी लिया”
प्रधान पाठक ने आगे कहा कि वे आदिवासी समुदाय से आते हैं, इसलिए शराब पीना उनके लिए सामान्य बात है। उन्होंने मीडिया के सामने अपनी गलती को भी स्वीकार किया, लेकिन इससे बच्चों पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव और शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर चिंता और गहरी हो गई है।
कब सुधरेगी सरकारी स्कूलों की हालत?
एक ओर सरकार शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने और सरकारी स्कूलों में बच्चों के नामांकन को प्रोत्साहित करने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी ओर शिक्षकों का ऐसा गैरजिम्मेदाराना रवैया इन प्रयासों पर पानी फेर रहा है।
क्या ऐसे हालात में बच्चे सही दिशा में आगे बढ़ पाएंगे?
क्या शिक्षक अपने वेतन के अनुरूप जिम्मेदारी निभाएंगे?
ये सवाल आज हर उस माता-पिता के मन में हैं, जो अपने बच्चों को बेहतर भविष्य की उम्मीद में सरकारी स्कूल भेजते हैं। अब देखना यह है कि प्रशासन इस पर क्या कार्रवाई करता है और क्या शिक्षकों में कोई सुधार आता है।




