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Anti-Paper Leak Bill: एंटी पेपर लीक बिल पर सदम में बहस, केंद्रीय मंत्री ने गिनाए कब-कब हुए थे पेपर लीक, गोगोई ने सरकार को घेरा

नई दिल्ली। Anti-Paper Leak Bill: लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षाओं में होने वाली गड़बड़ियों पर रोक लगाने के उद्देश्य से लाए गए लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा शुरू हो गई। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सदन में विधेयक पर बहस की शुरुआत करते हुए कहा कि सरकार युवाओं के भविष्य से किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगी और परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी व सुरक्षित बनाने के लिए यह संशोधन लाया गया है।

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चर्चा के दौरान केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पेपर लीक की घटनाएं केवल वर्तमान समय की समस्या नहीं हैं, बल्कि पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल में भी ऐसे मामले सामने आते रहे हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर एकीकृत परीक्षा प्रणाली की आवश्यकता वर्षों पहले महसूस की गई थी, लेकिन उस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए। उनके अनुसार, केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) की स्थापना कर परीक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। जितेंद्र सिंह ने कहा कि पहले से लागू कानून को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से यह संशोधन प्रस्तावित किया गया है, ताकि पेपर लीक, संगठित नकल और परीक्षा से जुड़े अपराधों पर सख्ती से अंकुश लगाया जा सके।

बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि, “यह बिल, जिसे कल पेश किया गया था, असल में पहले वाले बिल – पब्लिक एग्ज़ामिनेशन्स प्रिवेंशन ऑफ़ अनफेयर मीन्स एक्ट 2024 – में एक संशोधन है, जिसे भी इसी सरकार ने पेश किया था। और न सिर्फ़ पेश किया था, बल्कि यह शायद आज़ाद भारत के इतिहास में अपनी तरह का पहला बिल था। पहले वाला बिल और आज का संशोधन, एक तरह से, देश के छात्रों और युवाओं के कल्याण की रक्षा के लिए इस सरकार की गहरी प्रतिबद्धता को फिर से पुष्ट करते हैं। और साथ ही, यह प्रधानमंत्री मोदी के उस संकल्प को भी दोहराता है – कि ‘भारत माता’ के बच्चों के भविष्य के साथ किसी को भी खिलवाड़ नहीं करने दिया जाएगा। इसलिए, इस बिल को एक तरह से भारतीय संसद के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होने वाला कानून कहा जा सकता है।”

गोगोई ने उठाए सरकार के दावों पर सवाल

वहीं, कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने सरकार के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि 2024 का कानून पहले से ही इतना सख्त था, तो उसके बाद भी कई परीक्षाओं में गड़बड़ियां क्यों सामने आईं। उन्होंने आरोप लगाया कि केवल कानून में संशोधन करने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि जवाबदेही भी तय करनी होगी। गोगोई ने राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) के कामकाज पर सवाल उठाते हुए कहा कि परीक्षा प्रणाली में लगातार विवाद सामने आने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के दौरान बल प्रयोग किया गया और सरकार को इस पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

मंत्री जितेंद्र सिंह ने बताया कब-कब हुआ था पेपर लीक

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने UPA के समय हुए पेपर लीक की लिस्ट गिनाई; उन्होंने कहा, “2009- रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड; 2011- ऑल इंडिया इंजीनियरिंग एंट्रेंस एग्जामिनेशन; 2012- AIIMS नई दिल्ली एंट्रेंस पेपर लीक; 2013- महाराष्ट्र सेकेंडरी सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन। अगर मैं इनकी लिस्ट बनाता रहा, तो बिल पर चर्चा नहीं कर पाऊंगा… 2010- B.Ed. एंट्रेंस एग्जामिनेशन, उत्तर प्रदेश; 2012- तमिलनाडु पब्लिक सर्विस कमीशन। 2009- वेस्ट बंगाल जॉइंट एंट्रेंस एग्जाम। इसलिए, इस सरकार को एक खास कानून की ज़रूरत महसूस हुई।

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उन्होंने कहा कि, भारत सरकार के तहत चार बड़ी रिक्रूटमेंट एजेंसियां ​​हैं- UPSC, स्टाफ सिलेक्शन कमीशन, रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड और इंस्टीट्यूट ऑफ़ बैंकिंग पर्सनल; और इसी तरह, हायर एजुकेशन में एडमिशन के लिए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी है। NTA भी इसी सरकार ने 2017 में बनाई थी। 1992 में—पहली बार—कांग्रेस पार्टी की अगुवाई वाली भारत सरकार से एक कॉमन नेशनल टेस्टिंग एजेंसी बनाने की सिफारिश की गई थी। फिर, 2010 में, UPA के कार्यकाल के दौरान, एक कमेटी ने भी यही सुझाव दिया; मुझे नहीं पता कि इस पर ठीक से विचार क्यों नहीं किया गया, चाहे जो भी कारण या निजी हित रहे हों। इसलिए, मुझे लगता है कि आपको प्रधानमंत्री मोदी और इस सरकार की तारीफ़ करनी चाहिए। इसने एक ऐसा काम पूरा किया है—एक अधूरा काम—जिसे आपको खुद पूरा करना चाहिए था।”

 

Anti-Paper Leak Bill:  वहीं बहस के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर तीखी नोकझोंक देखने को मिली। सरकार ने संशोधन विधेयक को परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और निष्पक्षता की दिशा में अहम कदम बताया, जबकि विपक्ष ने इसे केवल औपचारिक पहल बताते हुए प्रभावी क्रियान्वयन और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग उठाई। फिलहाल विधेयक पर सदन में चर्चा जारी है और विभिन्न दलों के सांसद अपने-अपने पक्ष रख रहे हैं।

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