Bulldozer Action On Mosque: कलेक्ट्रेट परिसर में बने मस्जिद पर चला बुलडोजर, डेढ़ साल पुराने जमीन विवाद के बाद प्रशासन की कार्रवाई
सहारनपुर। Bulldozer Action On Mosque: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को लेकर चल रहे करीब डेढ़ साल पुराने विवाद ने शनिवार सुबह नया मोड़ ले लिया। प्रशासन ने तड़के कार्रवाई करते हुए मस्जिद के कथित अवैध निर्माण को हटाना शुरू कर दिया। सुबह करीब 4 बजे से प्रशासनिक गतिविधियां तेज हुईं और लगभग 6 बजे बुलडोजर मौके पर पहुंच गए। कार्रवाई के दौरान कलेक्ट्रेट परिसर के गेट बंद कर दिए गए और इलाके में भारी पुलिस बल के साथ आरआरएफ की कंपनियां तैनात रहीं।
चार बुलडोजरों की मदद से मस्जिद के हिस्से को हटाया गया। इसके बाद ध्वस्तीकरण से निकले मलबे को नगर निगम की गाड़ियों के जरिए मौके से हटाने का काम शुरू कर दिया गया।
जमीन के मालिकाना हक से शुरू हुआ विवाद
इस पूरे मामले की जड़ जमीन के स्वामित्व को लेकर चल रहा विवाद है। प्रशासन का पक्ष रहा है कि कलेक्ट्रेट परिसर में जिस जमीन पर मस्जिद बनी है, वह सरकारी संपत्ति है। इसी आधार पर मामला सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत तक पहुंचा था। 16 जुलाई को सिटी मजिस्ट्रेट कुलदीप सिंह की अदालत ने विवादित भूमि को सरकारी जमीन माना और मस्जिद के निर्माण को अवैध करार देते हुए परिसर खाली करने का आदेश दिया। आदेश में क्षतिपूर्ति की रकम भी निर्धारित की गई थी।
6.41 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति का आदेश
मामले में सबसे अहम पहलुओं में से एक 6 करोड़ 41 लाख 65 हजार 565 रुपये की क्षतिपूर्ति है। प्रशासन की ओर से सरकारी जमीन के इस्तेमाल से जुड़े नुकसान के एवज में यह राशि निर्धारित की गई। हालांकि, मस्जिद कमेटी ने प्रशासन के दावे को स्वीकार नहीं किया। कमेटी का कहना था कि मस्जिद नई बनी हुई संरचना नहीं है, बल्कि वहां लंबे समय से धार्मिक गतिविधियां होती रही हैं।
मस्जिद कमेटी ने बताया 100 साल से ज्यादा पुरानी
मस्जिद कमेटी की ओर से दावा किया गया कि यह धार्मिक स्थल करीब 150 वर्ष पुराना है। कमेटी ने जमीन को वक्फ संपत्ति बताते हुए अपने पक्ष में पुराने दस्तावेज होने की बात कही। विपक्षी नेताओं और एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की ओर से भी दावा किया गया कि मस्जिद पक्ष ने अदालत के समक्ष पुराने रिकॉर्ड पेश किए थे। उनके मुताबिक, 1911 तक के दस्तावेजों का हवाला दिया गया और लंबे समय से वहां नमाज अदा किए जाने की बात रखी गई। हालांकि, प्रशासन और अदालत के आदेश में इन दावों को पर्याप्त कानूनी आधार नहीं माना गया और विवादित भूमि को सरकारी संपत्ति माना गया।
जिला अदालत में भी नहीं मिली राहत
सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश के खिलाफ मस्जिद कमेटी ने जिला अदालत का रुख किया। मामले की सुनवाई जिला जज सतेंद्र कुमार की अदालत में हुई। 2 सितंबर को जिला अदालत ने मस्जिद कमेटी की अपील खारिज करते हुए सिटी मजिस्ट्रेट के 16 जुलाई के आदेश को बरकरार रखा। प्रशासन ने इसी न्यायिक आदेश को ध्वस्तीकरण की कार्रवाई का आधार बताया। सहारनपुर मंडल के डीआईजी अभिषेक सिंह के मुताबिक, निचली अदालत के आदेश के खिलाफ दायर अपील खारिज होने के बाद प्रशासन ने आगे की कार्रवाई की।
रात से ही बढ़ा पुलिस का पहरा
जिला अदालत के फैसले के बाद सहारनपुर में इस मामले को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल बढ़ गई थी। शुक्रवार रात से ही कलेक्ट्रेट और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी। कई राजनीतिक नेताओं ने मौके पर पहुंचने की कोशिश की। पुलिस ने कलेक्ट्रेट के मुख्य गेट पर बैरिकेडिंग कर नेताओं को अंदर जाने से रोक दिया। अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच बातचीत भी हुई।
तड़के शुरू हुई कार्रवाई
शनिवार सुबह प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू की। करीब 4 बजे से परिसर में गतिविधियां शुरू हो गईं और कुछ देर बाद बुलडोजर भी मौके पर पहुंच गए। कलेक्ट्रेट परिसर को आम लोगों की आवाजाही से अलग रखा गया। सुरक्षा के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों के साथ आरआरएफ की टीमें भी तैनात की गईं। करीब चार बुलडोजरों की मदद से मस्जिद के विवादित हिस्से को हटाया गया और बाद में मलबा नगर निगम की गाड़ियों में भरकर बाहर ले जाया गया।
डीआईजी के अनुसार, मौजूदा समय में त्योहारों को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को विशेष रूप से मजबूत किया गया है। पुलिस ने सोशल मीडिया पर अफवाह या भ्रामक जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।
इकरा हसन ने लगाया हाउस अरेस्ट का आरोप
कार्रवाई से पहले कैराना की सपा सांसद इकरा हसन ने आरोप लगाया कि उन्हें सहारनपुर जाने से रोकने के लिए उनके आवास पर पुलिस बल तैनात किया गया और उन्हें घर से बाहर निकलने नहीं दिया गया। इकरा हसन का कहना था कि वह सहारनपुर पहुंचकर अधिकारियों से मुलाकात करना चाहती थीं और स्थानीय लोगों की समस्याएं उनके सामने रखना चाहती थीं। सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने भी जनप्रतिनिधियों को रोके जाने को लेकर सवाल उठाए।
इमरान मसूद और ओवैसी ने उठाए सवाल
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने मस्जिद पर हुई कार्रवाई को लेकर प्रशासन और सरकार पर निशाना साधा। उनका दावा है कि मस्जिद काफी पुरानी है और उसके समर्थन में पुराने दस्तावेज अदालत में पेश किए गए थे। उन्होंने वक्फ और ‘वक्फ बाय यूजर’ से जुड़े कानूनी पहलुओं का भी उल्लेख किया।
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी मस्जिद की पुरानी स्थिति और जमीन के रिकॉर्ड को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने लंबे समय से धार्मिक उपयोग में रही संपत्ति के अधिकार और कानूनी स्थिति पर सवाल खड़े किए। हालांकि, ये दावे मस्जिद कमेटी और विपक्षी नेताओं की ओर से रखे गए हैं। प्रशासन का पक्ष इससे अलग है। प्रशासन के अनुसार, संबंधित जमीन सरकारी है और अदालत के आदेशों के बाद ही ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई है।
अब आगे क्या?
फिलहाल इस विवाद के तीन प्रमुख पहलू बने हुए हैं जमीन का मालिकाना हक, मस्जिद की पुरातनता से जुड़े दस्तावेज और अदालत के आदेशों की आगे की कानूनी स्थिति। प्रशासन का कहना है कि न्यायिक आदेशों के अनुपालन में कार्रवाई की गई है, जबकि मस्जिद कमेटी और विपक्षी नेता अपने कानूनी दावों को आगे भी अदालत में रखने की बात कह रहे हैं।
Bulldozer Action On Mosque: शनिवार की कार्रवाई के बाद कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई है। प्रशासन की ओर से मलबा हटाने का काम जारी है और पुलिस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है।



