Raipur News: छत्तीसगढ़ में रेल परियोजनाओं को मिली नई रफ्तार, 2026-27 में ₹7,470 करोड़ का बजट; 36 प्रोजेक्ट पर काम जारी
रायपुर। Raipur News: छत्तीसगढ़ में रेलवे के विस्तार और आधुनिकीकरण को लेकर पिछले कुछ वर्षों में तेजी आई है। रेल मंत्रालय के अनुसार, राज्य में रेलवे से जुड़ी बुनियादी सुविधाओं, सुरक्षा और नई परियोजनाओं के लिए बजट में बड़ा इजाफा हुआ है। वित्त वर्ष 2026-27 में छत्तीसगढ़ के लिए ₹7,470 करोड़ का रेलवे बजट निर्धारित किया गया है। रेल मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2009-14 के दौरान राज्य को रेलवे परियोजनाओं के लिए औसतन ₹311 करोड़ सालाना मिलते थे। मौजूदा आवंटन इसकी तुलना में करीब 24 गुना अधिक है। राज्यसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने छत्तीसगढ़ में चल रहे रेल विकास कार्यों और भविष्य की योजनाओं से संबंधित जानकारी साझा की।
नई रेल लाइनों के निर्माण की रफ्तार में बड़ा उछाल
छत्तीसगढ़ में नई रेल पटरियों के निर्माण और उन्हें चालू करने की गति में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। रेल मंत्रालय के अनुसार, 2009-14 के बीच हर साल औसतन 6.4 किलोमीटर नई रेल लाइन शुरू की जाती थी। वहीं 2014 से 2026 के बीच यह औसत बढ़कर 109.29 किलोमीटर प्रति वर्ष हो गया। इस अवधि में राज्य में कुल 1,311 किलोमीटर नई रेल लाइन का निर्माण पूरा कर उसे परिचालन में लाया गया है।
36 रेल परियोजनाओं पर चल रहा काम
रेल मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 1 अप्रैल 2026 तक छत्तीसगढ़ में 36 रेल परियोजनाएं सक्रिय हैं। इनमें 8 नई रेल लाइन और 28 दोहरीकरण परियोजनाएं शामिल हैं। इन सभी परियोजनाओं की कुल लंबाई करीब 2,398 किलोमीटर है, जबकि इनके लिए कुल ₹48,202 करोड़ की लागत स्वीकृत की गई है। इनमें से 1,151 किलोमीटर रेल लाइन का काम पूरा होकर चालू हो चुका है।
पूरी हो चुकीं कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं
राज्य में कई रणनीतिक और औद्योगिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रेल परियोजनाओं को पूरा किया जा चुका है। इनमें प्रमुख परियोजनाएं शामिल हैं
दल्लीराजहरा-रावघाट रेल लाइन- करीब 95 किलोमीटर लंबी इस नई रेल लाइन पर ₹1,628 करोड़ खर्च किए गए। यह परियोजना स्टील उद्योग के लिए आवश्यक कच्चे माल वाले क्षेत्रों से कनेक्टिविटी बढ़ाने में महत्वपूर्ण मानी जाती है।
चांपा-झारसुगुड़ा तीसरी रेल लाइन- करीब 152 किलोमीटर लंबी इस परियोजना पर ₹1,227 करोड़ खर्च हुए हैं। इससे माल ढुलाई वाले प्रमुख रेल मार्ग की क्षमता बढ़ाने में मदद मिली है।
रायपुर-टिटलागढ़ दोहरीकरण- 203 किलोमीटर लंबी इस परियोजना को करीब ₹1,171 करोड़ की लागत से पूरा किया गया है।
खरसिया-कोरिछापार नई रेल लाइन- करीब 43 किलोमीटर लंबी इस रेल परियोजना पर ₹851 करोड़ खर्च किए गए। इससे खनिज क्षेत्रों की रेल कनेक्टिविटी को मजबूती मिली है।
इन बड़ी परियोजनाओं पर अभी काम जारी
छत्तीसगढ़ में कई बड़ी रेल परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं। इनमें नई रेल लाइन और डबलिंग प्रोजेक्ट दोनों शामिल हैं।
- खरसिया-परमलकसा नई डबल लाइन — 278 किमी, लागत ₹7,854 करोड़
- गेवरा रोड-पेंड्रा रोड नई रेल लाइन — 135 किमी, लागत ₹3,724 करोड़
- रावघाट-जगदलपुर नई रेल लाइन — 140 किमी, लागत ₹3,513 करोड़
- खरसिया-धरमजयगढ़ नई रेल लाइन — 122 किमी, लागत ₹3,407 करोड़
इनमें रावघाट-जगदलपुर रेल लाइन को बस्तर क्षेत्र में रेल नेटवर्क के विस्तार की दृष्टि से विशेष महत्व दिया जा रहा है।
आदिवासी और दूरदराज इलाकों तक रेल पहुंचाने की तैयारी
रेलवे की योजना ऐसे क्षेत्रों तक कनेक्टिविटी बढ़ाने की भी है, जहां अभी रेल सुविधा सीमित या उपलब्ध नहीं है। मंत्रालय के अनुसार, हाल के वर्षों में 2,455 किलोमीटर लंबाई वाली 14 फाइनल लोकेशन सर्वे (FLS) परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है।
इसके अलावा कई प्रस्तावित रेल मार्गों की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) भी तैयार की जा चुकी है। इनमें—
- अंबिकापुर-रामानुजगंज-गढ़वा रोड/बरवाडीह — 262 किमी
- सरडेगा-पत्थलगांव-अंबिकापुर — 218 किमी
- धरमजयगढ़-पत्थलगांव-लोहरदगा — 292 किमी
इसके साथ ही आदिवासी और खनिज बहुल क्षेत्रों को जोड़ने वाले कई अन्य रेल मार्गों के सर्वे का काम भी चल रहा है। इनमें गढ़चिरौली-बीजापुर-बचेली (490 किमी), कोठागुडेम-किरंदुल (180 किमी) और धमतरी-बांसकोट-अमरावती-कोंडागांव (183 किमी) जैसे प्रस्तावित रेल मार्ग शामिल हैं।
यात्री सुविधाओं और नई ट्रेन सेवाओं पर भी जोर
रेल नेटवर्क के विस्तार के साथ यात्रियों के लिए सेवाओं में भी बढ़ोतरी की गई है। रेल मंत्रालय के अनुसार, छत्तीसगढ़ में 18 नई ट्रेन सेवाएं शुरू की गई हैं। राज्य में फिलहाल दो जोड़ी वंदे भारत एक्सप्रेस का संचालन हो रहा है। इनमें दुर्ग-विशाखापट्टनम और बिलासपुर-नागपुर वंदे भारत एक्सप्रेस शामिल हैं। इसके अलावा उधना-ब्रह्मपुर अमृत भारत एक्सप्रेस भी राज्य से होकर गुजरती है। स्थानीय यात्रियों की सुविधा के लिए रायपुर-अंतागढ़ डेमू समेत कई मेमू और डेमू सेवाओं का संचालन किया जा रहा है। रायपुर, राजिम और अभनपुर समेत विभिन्न क्षेत्रों में स्थानीय रेल संपर्क को और बेहतर बनाने पर भी काम किया जा रहा है।
परियोजनाओं के सामने कई व्यावहारिक चुनौतियां
रेल मंत्रालय के मुताबिक, किसी भी रेल परियोजना को मंजूरी देने से लेकर उसे पूरा करने तक कई स्तरों पर प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। इनमें वन मंजूरी, भूमि अधिग्रहण, उपयोगिताओं का स्थानांतरण तथा भौगोलिक और भूगर्भीय परिस्थितियां प्रमुख हैं। इन कारणों से कई परियोजनाओं में समय लग सकता है। मंत्रालय का कहना है कि इन बाधाओं को चरणबद्ध तरीके से दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।
माल ढुलाई से लेकर यात्री कनेक्टिविटी तक फोकस
Raipur News: छत्तीसगढ़ खनिज और औद्योगिक गतिविधियों की दृष्टि से महत्वपूर्ण राज्य है। ऐसे में रेलवे के विस्तार का एक प्रमुख उद्देश्य माल परिवहन की क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ आदिवासी और दूरस्थ इलाकों को बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना भी है। रेल मंत्रालय के अनुसार, आने वाले वर्षों में नई लाइनों, दोहरीकरण, यात्री सेवाओं और आधुनिक रेल बुनियादी ढांचे के विस्तार के जरिए छत्तीसगढ़ के रेल नेटवर्क को और मजबूत करने की दिशा में काम जारी रहेगा।




