
Jhiram Ghati Massacre: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी हत्याकांड मामले में सोमवार को आने वाला फैसला टल गया है। जगदलपुर स्थित NIA की विशेष अदालत ने अब इस मामले में फैसला सुनाने के लिए **5 सितंबर 2026** की तारीख तय की है। इससे पहले अदालत ने 12 अगस्त को दोनों पक्षों की अंतिम बहस पूरी होने के बाद 31 अगस्त को फैसला सुनाने की तारीख निर्धारित की थी।
करीब 13 साल पुराने इस मामले में लंबे समय से चल रही न्यायिक प्रक्रिया अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुकी है। सोमवार को फैसला आने की उम्मीद थी, लेकिन विशेष अदालत ने निर्णय की तारीख आगे बढ़ा दी। अब 5 सितंबर को अदालत के फैसले पर सभी की निगाहें रहेंगी।
25 मई 2013 को झीरम घाटी में हुआ था हमला
झीरम घाटी हत्याकांड 25 मई 2013 को हुआ था। उस समय छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव होने में करीब छह महीने का समय बचा था। कांग्रेस पार्टी ने चुनाव की तैयारियों के तहत राज्य में परिवर्तन यात्रा शुरू की थी।
25 मई को कांग्रेस नेताओं का काफिला सुकमा से जगदलपुर की ओर लौट रहा था। काफिला बस्तर के दरभा क्षेत्र स्थित झीरम घाटी से गुजर रहा था। इसी दौरान घात लगाकर बैठे भारी संख्या में नक्सलियों ने काफिले पर हमला कर दिया।
नक्सलियों ने पहले IED विस्फोट कर काफिले को निशाना बनाया। विस्फोट के बाद चारों तरफ से गोलीबारी शुरू कर दी गई। अचानक हुए इस हमले में काफिले में मौजूद लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला।
हमले में कई बड़े कांग्रेस नेताओं की हुई थी मौत
झीरम घाटी हमले में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं समेत सुरक्षा बल के जवानों और अन्य लोगों की मौत हुई थी। इस घटना में **27 लोगों की जान गई थी, जबकि करीब 35 लोग घायल हुए थे।
हमले में तत्कालीन कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नंद कुमार पटेल, पूर्व मंत्री महेंद्र कर्मा और वरिष्ठ कांग्रेस नेता विद्या चरण शुक्ल समेत कई प्रमुख नेताओं की मौत हुई थी।बस्तर में नक्सल विरोधी अभियान सलवा जुडूम से जुड़े होने के कारण महेंद्र कर्मा भी नक्सलियों के निशाने पर माने जाते थे। उनकी हत्या ने इस हमले को और भी गंभीर बना दिया था।
नक्सलियों ने कैसे बिछाया था मौत का जाल?
झीरम घाटी का इलाका घने जंगलों और पहाड़ियों से घिरा हुआ है। नक्सलियों ने इसी भौगोलिक स्थिति का फायदा उठाते हुए काफिले को निशाना बनाया था।
काफिले के झीरम घाटी पहुंचते ही पहले विस्फोट किया गया। इसके बाद जंगल और पहाड़ी इलाकों में छिपे नक्सलियों ने गोलीबारी शुरू कर दी। हमले की अचानकता और बड़े पैमाने पर की गई फायरिंग ने काफिले में शामिल लोगों को गंभीर खतरे में डाल दिया।इस हमले को छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि देश के सबसे बड़े और भीषण नक्सली हमलों में गिना गया।
करीब 13 साल बाद अब फैसले का इंतजार
घटना के बाद मामले की जांच और कानूनी प्रक्रिया लंबे समय तक चली। अब NIA की विशेष अदालत में इस मामले की सुनवाई पूरी हो चुकी है।12 अगस्त 2026 को दोनों पक्षों की अंतिम बहस पूरी हुई थी। इसके बाद अदालत ने 31 अगस्त को फैसला सुनाने की तारीख तय की थी। हालांकि, सोमवार को अदालत ने फैसला टालते हुए अब 5 सितंबर 2026 की तारीख तय कर दी।
इस मामले में पहले कुल 11 आरोपी थे। इनमें से एक आरोपी की मौत हो चुकी है। अब **10 आरोपियों** के खिलाफ मामले में अदालत का फैसला आना बाकी है।
5 सितंबर को आएगा बड़ा फैसला
झीरम घाटी हत्याकांड को लेकर लंबे समय से न्याय की प्रतीक्षा की जा रही है। करीब 13 साल बाद मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद अब अदालत के निर्णय का इंतजार है।5 सितंबर 2026** को NIA की विशेष अदालत इस मामले में अपना फैसला सुनाएगी। फैसले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी काफी उत्सुकता है। अब देखना होगा कि अदालत इस बहुचर्चित मामले में क्या निर्णय सुनाती है।




