Papankusha Ekadashi 2026: पापांकुशा एकादशी आज, जानें पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और व्रत पारण का समय
मान्यता है कि पापांकुशा एकादशी पर भगवान विष्णु की आराधना, मंत्र जाप और दान-पुण्य करने से भक्तों को पुण्य की प्राप्ति होती है। श्रद्धालु इस अवसर पर परिवार में सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हैं।
तिथि को लेकर असमंजस
इस बार पापांकुशा एकादशी की तारीख को लेकर 21 और 22 अक्टूबर के बीच भ्रम की स्थिति बनी रही। इसकी वजह एकादशी तिथि का दो कैलेंडर दिनों में पड़ना है। पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि 21 अक्टूबर को दोपहर 2 बजकर 11 मिनट पर शुरू हुई और 22 अक्टूबर को दोपहर 2 बजकर 47 मिनट पर समाप्त होगी। सूर्योदय के समय एकादशी तिथि होने के आधार पर इस साल व्रत 22 अक्टूबर, गुरुवार को रखा जा रहा है। गुरुवार का दिन भी भगवान विष्णु की पूजा के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है, इसलिए इस दिन की धार्मिक महत्ता और बढ़ जाती है।
तिथि और पारण का समय
व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए एकादशी तिथि के साथ-साथ द्वादशी के दिन व्रत खोलने यानी पारण का समय जानना भी जरूरी है।
- एकादशी तिथि प्रारंभ: 21 अक्टूबर 2026, दोपहर 2:11 बजे
- एकादशी तिथि समाप्त: 22 अक्टूबर 2026, दोपहर 2:47 बजे
- व्रत की तारीख: गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026
- पारण की तारीख: शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026
पंचांग में दिए गए विवरण के मुताबिक, चेन्नई में 23 अक्टूबर को पारण का समय सुबह 6 बजे से 8 बजकर 21 मिनट तक बताया गया है। वहीं, दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों के लिए सुबह 6 बजकर 27 मिनट से 8 बजकर 42 मिनट तक का समय दिया गया है। ध्यान रहे कि सूर्योदय और पारण का समय शहर के अनुसार बदल सकता है। इसलिए व्रत खोलने से पहले अपने क्षेत्र के स्थानीय पंचांग से समय की पुष्टि कर लेना उचित रहेगा।
पापांकुशा एकादशी पर पूजा का शुभ मुहूर्त
पापांकुशा एकादशी पर सुबह स्नान के बाद भगवान विष्णु की पूजा करना शुभ माना जाता है। धार्मिक परंपरा के अनुसार, ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना, साफ वस्त्र धारण करना और पूजा स्थल को स्वच्छ रखना अच्छा माना जाता है।
इस वर्ष प्रकाशित पंचांग विवरण के अनुसार प्रमुख मुहूर्त इस प्रकार हैं:
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:50 बजे से 5:38 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:42 बजे से दोपहर 12:28 बजे तक
- विजय मुहूर्त: दोपहर 1:57 बजे से 2:44 बजे तक
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 5:13 बजे से 5:37 बजे तक
ये समय स्थान के अनुसार अलग हो सकते हैं। भगवान विष्णु की पूजा के लिए किसी एक मुहूर्त में पूजा करना अनिवार्य नहीं है। श्रद्धालु अपनी सुविधा और स्थानीय पंचांग के अनुसार सुबह या शाम आराधना कर सकते हैं।
कैसे करें भगवान विष्णु की पूजा?
इस दिन पूजा करते समय श्रद्धा, स्वच्छता और मन की एकाग्रता का ध्यान रखना महत्वपूर्ण माना जाता है। घर पर इस तरह पूजा की जा सकती है:
1. स्नान कर व्रत का संकल्प लें
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ कपड़े पहनें। पूजा स्थल को साफ करने के बाद भगवान विष्णु के सामने हाथ जोड़कर व्रत रखने का संकल्प लें। अपनी सेहत और क्षमता को ध्यान में रखते हुए व्रत का तरीका चुनें।
2. भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाएं
पूजा स्थल पर भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। इसके बाद दीपक और धूप जलाएं। भगवान को पीले फूल, फल और अपनी श्रद्धा के अनुसार भोग अर्पित करें। धार्मिक मान्यता में पीले रंग को भगवान विष्णु से विशेष रूप से जोड़ा जाता है।
3. तुलसी दल अर्पित करें
भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी का विशेष महत्व बताया गया है। श्रद्धालु पूजा के दौरान तुलसी दल अर्पित कर सकते हैं। इस संबंध में अपनी पारिवारिक और धार्मिक परंपराओं का पालन करें।
4. विष्णु मंत्र का जाप करें
पूजा के समय भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप किया जा सकता है। इनमें ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र प्रमुख है। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार विष्णु सहस्रनाम, विष्णु चालीसा या भगवान विष्णु की स्तुति का पाठ भी कर सकते हैं।
5. पापांकुशा एकादशी की व्रत कथा पढ़ें
एकादशी पर व्रत कथा सुनने या पढ़ने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, कथा भक्तों को भक्ति, प्रायश्चित और अच्छे कर्मों के महत्व की प्रेरणा देती है।
6. आरती कर दान-पुण्य करें
पूजा के अंत में भगवान विष्णु की आरती करें और परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना करें। इसके बाद अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र, फल या अन्य उपयोगी वस्तुएं दान कर सकते हैं।
पापांकुशा एकादशी पर क्या करना शुभ माना जाता है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन कुछ कार्यों को विशेष महत्व दिया जाता है। श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार इनका पालन कर सकते हैं।
- सुबह स्नान के बाद भगवान विष्णु की पूजा करें।
- दिनभर भगवान के नाम का स्मरण और मंत्र जाप करें।
- विष्णु सहस्रनाम या एकादशी व्रत कथा का पाठ करें।
- जरूरतमंद लोगों की सहायता करें।
- अपनी क्षमता के अनुसार अन्न, फल, वस्त्र या उपयोगी वस्तुओं का दान करें।
- वाणी और व्यवहार में संयम रखें तथा किसी के प्रति द्वेष रखने से बचें।
किन बातों का रखें ध्यान?
एकादशी व्रत के दौरान खानपान को लेकर अलग-अलग परिवारों और धार्मिक परंपराओं में नियम प्रचलित हैं। सामान्य तौर पर व्रत रखने वाले श्रद्धालु चावल, गेहूं और सामान्य अनाज से परहेज करते हैं। फलाहार करने वाले लोग अपनी परंपरा के अनुसार फल, दूध और व्रत में स्वीकार्य खाद्य पदार्थों का सेवन कर सकते हैं।
इस दिन विवाद करने, अपशब्द बोलने और दूसरों को नुकसान पहुंचाने से बचने की सलाह दी जाती है। पूजा के दौरान स्वच्छता और मन की एकाग्रता बनाए रखना भी महत्वपूर्ण माना जाता है। हर व्यक्ति के लिए निर्जला व्रत रखना आवश्यक नहीं है। उम्र, स्वास्थ्य और शारीरिक क्षमता के अनुसार ही उपवास का तरीका चुनना चाहिए। बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं, बीमार लोगों और नियमित दवा लेने वालों को व्रत के दौरान अपनी सेहत का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
पापांकुशा एकादशी का धार्मिक महत्व
Papankusha Ekadashi 2026: पापांकुशा एकादशी भगवान विष्णु के पद्मनाभ स्वरूप की पूजा से जुड़ी है। हिंदू धार्मिक मान्यताओं में इस दिन व्रत, पूजा-पाठ और दान-पुण्य को शुभ माना गया है। श्रद्धालु भगवान विष्णु की आराधना कर आध्यात्मिक शांति और जीवन में सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। इस पर्व का संदेश केवल उपवास तक सीमित नहीं है, बल्कि भक्ति, संयम, सदाचार और जरूरतमंदों की मदद करने की भावना से भी जुड़ा है।




