US-Iran Tensions: फिर बढ़ा रहा अमेरिका-ईरान के बीच तनाव? होर्मुज खोलने ट्रंप ने दिया 24 घंटे का अल्टीमेटम, दे दी ये चेतावनी
वॉशिंगटन/तेहरान। US-Iran Tensions: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिकी प्रशासन ने ईरान को 24 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि वह सार्वजनिक रूप से यह घोषणा करे कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) सभी व्यावसायिक (कमर्शियल) जहाजों के लिए सुरक्षित और खुला रहेगा और व्यापारिक जहाजों पर किसी भी तरह के हमले नहीं होंगे। अमेरिकी पक्ष ने स्पष्ट किया है कि यदि तय समय के भीतर ईरान की ओर से सकारात्मक और सार्वजनिक आश्वासन नहीं दिया जाता, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा की मांग
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी प्रशासन ने ईरान तक अपना संदेश सीधे और क्षेत्रीय मध्यस्थों के माध्यम से पहुंचाया है। वॉशिंगटन चाहता है कि ईरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह भरोसा दे कि समुद्री व्यापार प्रभावित नहीं होगा और होर्मुज़ मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।
समझौते के उल्लंघन का आरोप
अमेरिका का आरोप है कि हाल के दिनों में व्यावसायिक जहाजों को निशाना बनाकर ईरान ने पूर्व में हुए समझौतों की भावना का उल्लंघन किया है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इन घटनाओं के कारण उन्हें सैन्य प्रतिक्रिया भी देनी पड़ी। अब अमेरिका चाहता है कि ईरान भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने का स्पष्ट आश्वासन दे।
ओमान में होगी अहम वार्ता
बढ़ते तनाव के बीच ओमान की राजधानी मस्कट में ईरान और ओमान के अधिकारियों के बीच महत्वपूर्ण बैठक प्रस्तावित है। जानकारी के मुताबिक, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची भी इसमें शामिल होंगे। बैठक में समुद्री मार्गों की सुरक्षा और होर्मुज़ जलडमरूमध्य में निर्बाध नौवहन प्रमुख मुद्दे रहेंगे।
दुनिया के लिए क्यों अहम है होर्मुज़ जलडमरूमध्य?
होर्मुज़ जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग माना जाता है। दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस इसी रास्ते से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचती है। ऐसे में इस मार्ग पर किसी भी प्रकार का तनाव वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और तेल की कीमतों को प्रभावित कर सकता है।
वैश्विक बाजार की बढ़ी चिंता
US-Iran Tensions: अमेरिका की चेतावनी के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थिति पर नजर रखी जा रही है। यदि दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ता है तो इसका असर वैश्विक समुद्री व्यापार, ऊर्जा बाजार और पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति पर भी पड़ सकता है। फिलहाल सभी की निगाहें ओमान में होने वाली वार्ता और ईरान की आधिकारिक प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।




