CGPSC 2021: CGPSC भर्ती विवाद में अभ्यर्थियों को राहत, सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की सरकार की SLP
रायपुर। CGPSC 2021: छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) राज्य सेवा परीक्षा-2021 के चयनित अभ्यर्थियों के लिए सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से दायर विशेष अनुमति याचिकाओं (SLP) को खारिज करते हुए हाई कोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। इसके साथ ही उन चयनित अभ्यर्थियों के लिए नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है, जो CBI की जांच के दायरे में दोषी या संदिग्ध नहीं पाए गए हैं। राज्य सरकार को ऐसे अभ्यर्थियों को सशर्त नियुक्ति पत्र जारी करने के निर्देश का पालन करना होगा।
171 पदों के लिए हुई थी भर्ती प्रक्रिया
CGPSC ने राज्य सेवा परीक्षा-2021 के तहत डिप्टी कलेक्टर, DSP, नायब तहसीलदार, जेल अधीक्षक सहित 20 अलग-अलग सेवाओं के कुल 171 पदों पर भर्ती के लिए 26 नवंबर 2021 को विज्ञापन जारी किया था। प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू की प्रक्रिया पूरी होने के बाद आयोग ने 11 मई 2023 को अंतिम चयन सूची जारी की थी। इसमें बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों का विभिन्न प्रशासनिक एवं अन्य महत्वपूर्ण पदों के लिए चयन हुआ था।
भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोप
अंतिम चयन सूची सामने आने के बाद भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितता और भाई-भतीजावाद के आरोप लगाए गए। आरोप था कि कुछ नेताओं, अधिकारियों और PSC से जुड़े लोगों के करीबी अभ्यर्थियों को कथित तौर पर अनुचित लाभ मिला। इन आरोपों को लेकर भाजपा नेता और पूर्व गृह मंत्री ननकी राम कंवर ने बिलासपुर हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। बाद में राज्य सरकार की अनुशंसा पर मामले की जांच CBI को सौंप दी गई।
CBI जांच के बाद नियुक्तियों पर लगी रोक
CBI जांच शुरू होने के बाद राज्य सरकार ने चयन सूची में शामिल अभ्यर्थियों की नियुक्तियों पर रोक लगा दी। हालांकि कुछ विभागों में नियुक्तियां दी गईं, लेकिन डिप्टी कलेक्टर और DSP जैसे महत्वपूर्ण पदों पर चयनित कई अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र नहीं मिल सका।इससे चयनित अभ्यर्थियों में असमंजस की स्थिति बनी रही और उन्होंने नियुक्ति के लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
हाई कोर्ट ने निर्दोष अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने का दिया था आदेश
चयनित अभ्यर्थियों राणा विजय, अमित कुमार भारद्वाज, प्रज्ञा नायक सहित अन्य ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। मामले की सुनवाई के दौरान सिंगल बेंच ने CBI की प्रगति रिपोर्ट का अवलोकन किया। कोर्ट के समक्ष यह बात सामने आई कि जांच में कुछ सीमित अभ्यर्थियों के खिलाफ कार्रवाई और चार्जशीट की स्थिति बनी है। कोर्ट ने माना कि केवल कुछ उम्मीदवारों के खिलाफ जांच या आरोप होने के आधार पर पूरी चयन प्रक्रिया में शामिल सभी अभ्यर्थियों को नियुक्ति से वंचित रखना उचित नहीं होगा।
सिंगल बेंच ने राज्य सरकार को CBI की चार्जशीट के दायरे से बाहर रहे चयनित अभ्यर्थियों को 60 दिनों के भीतर सशर्त नियुक्ति पत्र जारी करने का निर्देश दिया था। साथ ही नियुक्ति पत्र में यह शर्त रखने को कहा गया था कि यदि भविष्य में किसी अभ्यर्थी के खिलाफ जांच में कोई प्रतिकूल तथ्य सामने आता है, तो उसकी नियुक्ति या सेवा पर नियमानुसार कार्रवाई की जा सकेगी।
राज्य सरकार की डिवीजन बेंच में भी नहीं चली अपील
सिंगल बेंच के आदेश के खिलाफ राज्य सरकार ने हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच में रिट अपील दायर की। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु की बेंच ने मामले की सुनवाई के बाद राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी और सिंगल बेंच के आदेश को बरकरार रखा। इसके बाद राज्य सरकार ने हाई कोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
सुप्रीम कोर्ट से भी सरकार को झटका
राज्य सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दाखिल की गई। मामले की सुनवाई जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने की। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से हुई देरी को माफ करने के बाद मामले की सुनवाई की, लेकिन हाई कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार की SLP खारिज कर दी। इसके साथ ही CBI जांच के दायरे से बाहर रहे चयनित अभ्यर्थियों को सशर्त नियुक्ति देने के हाई कोर्ट के आदेश को प्रभावी बनाए रखने का रास्ता साफ हो गया।
चयनित अभ्यर्थियों को अब नियुक्ति की उम्मीद
CGPSC 2021: सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद CGPSC 2021 के उन चयनित अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है, जो लंबे समय से नियुक्ति का इंतजार कर रहे थे। अब उन उम्मीदवारों के लिए नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है, जिनके खिलाफ CBI जांच में कोई प्रतिकूल या दोषसिद्ध करने वाला तथ्य सामने नहीं आया है। हालांकि भविष्य की जांच में कोई गंभीर तथ्य सामने आने पर नियुक्ति की शर्तों के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।




