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स्पेशल स्टोरी: सरकारी स्विमिंग पूल है या गंदा तालाब ? पहचानना मुश्किल..करोडों की लागत से बने सरकारी डाइविंग पूल की हालत हुई खस्ताहाल…

रायपुर/ हिमांशु पटेल- प्रदेश में तैराकी में नाम रोशन कर सके और अच्छे खिलाडी निकल कर सामने आये इसके लिए राजधानी रायपुर में 12 करोड़ की लागत से इंटरनेशनल स्वमिंग पुल बनाया गया था. लेकिन शहर में तैराक के शौकीन और खिलाड़ियों के लिए बनाया गया इंटरनेशनल स्वीमिंग पूल का एक हिस्सा लोकार्पण के बाद से ही बदहाल है।जो अधिकारियो के अनदेखी के चलते करोड़ो की लागत से बनी सम्पत्ति का हाल भगवान भरोसे है। ज्ञात हो हर शासकीय प्रोजेक्ट में बनाने से पहले टेंडर लेते हैं तो उसका मेंटेनेंस जुड़ा होता है लेकिन अधिकारीयो और निगम की अनदेखी के चलते उस निर्माण एजेंसी ने मेंटेनेंस करना भी नागवार समझा। गौरतलब है कि 2016 में 12 करोड़ 65 लाख रुपए की लागत से इसका निर्माण करवाया गया था। लेकिन अब मेंटेनेंस के अभाव में इसका एक हिस्सा डाइविंग पूल में लीकेज आ गया है। पूल के साथ ही इसका पानी फिल्टर करने के लिए लगाई गई मशीन भी वर्षों से खराब है, जिसका मेंटेनेंस नहीं करवाया जा रहा है। फिर करोड़ों रुपए की लागत से बना या सिस्टम पर अनदेखी क्यों की जा रही है यह समझ से परे है।


बता दें 2016 में 12 करोड़ 65 लाख की लागत से नगर निगम द्वारा इसका निर्माण करवाया गया था. साथ ही इसके संचालन के लिए निजी एजेंसी को जिम्मेदारी दी गई थी , लेकिन इस के लोकार्पण के बाद से ही वह स्विमिंग पूल का एक हिस्सा बदहाल हो गया है. हालात ऐसे हैं कि वहां बनाए गए डाइविंग पूल का पानी इतना गंदा और बदबूदार हो गया है, क्योंकि इसका मेंटेनेंस एजेंसी द्वारा नहीं कराया जा रहा है|बताया जा रहा है कि डाइविंग पूल तो शुरुआत से ही बंद पड़े हैं ,25 मीटर लंबे और 17 मीटर चौड़ी डाइविंग पूल  के पानी में अब कीड़े लग गए हैं,क्योंकि इसका पानी साफ करने के लिए लगाई गई फिल्टर मशीन ही बंद पड़ी है | जबकि डाइविंग पूल के लिए अलग से फिल्टर मशीन लगाया गया है| फिल्टर मशीन भी चालू नहीं किया गया है.इसके अलावा पूल  में काई जम गई है, यानी पुल की मरम्मत कराने लाखों रुपए खर्च करने पड़ेंगे.

वही पूल लिकेज की समस्या से भी जूझ रहा है.जिसकी वजह से यहां पानी भी नहीं ठहरता है, इतना ही नहीं पुल के पानी साफ करने के लिए लगाया गया फिल्टर पंप को भी कई वर्षों से खराब पड़ा हुआ है. ऐसे में रायपुर के तैराक ही इनका उपयोग नहीं कर पा रहे हैं.जबकि रोजाना 20 से 25 तैराक इसमें प्रैक्टिस करते हैं,साथ ही सबसे ज्यादा आम नागरिक भी यहां तैराकी सीखने के लिए आते हैं. वही पिछले 6 वर्षों में न तो कोई आयोजन करवाया गया है और ना ही कोई खिलाड़ियों ने मेडल जीता है. ऐसे लोगों की सुविधा के लिए बनाया गया या पुल किसी काम का नहीं रहा है. वही निगम द्वारा इसका निर्माण तो करवा लिया गया है ,लेकिन इसका हस्तांतरण 5 साल बाद भी एसोसिएशन को नहीं किया गया है,इसकी वजह से यह बदहाल स्थिति में चल रहा है. वहीं इसके संचालन के लिए एजेंसी को मेंटेनेंस का खर्चा भी निगम द्वारा दिया जाता है,

लेकिन इसके बावजूद सुधार नहीं हो रहा है. इधर निगम अपर आयुक्त सुनील चंद्रवंशी ने बताया कि यह बात आपके माध्यम से संज्ञान में आई है कि स्वीमिंग पुल के डविंग पार्ट है उसमें कुछ खराबी है उसके लिए संबंधित डिपार्टमेंट है उसको निर्देशित किया है. उसमें जो उपाय है, उसमें प्रपोजल प्रस्तुत करें क्योंकि यह पुराना है उसकी जो फाइल है अध्ययन किया जा रहा है.अगर उसमें ठेकेदार के संबंधित कार्रवाई शेष रहा हो तो वह कार्रवाई की जाएगी.

रायपुर के अलावा बिलासपुर में भी दो स्विमिंग पूल है जिनका संचालन एसोशियन द्वारा किया जा रहा है. यहां आने वाले तैराक को सहित अन्य खिलाड़ियों को भी इसकी निशुल्क सुविधा दी जाती है ,ताकि यहां से अच्छे स्तर पर खिलाड़ी निकल सके और छत्तीसगढ़ का नाम तैराकी में भी रोशन कर सके. लेकिन रायपुर में यह सुविधा नहीं मिल रही है ऐसे में इसका कोई खास लाभ यहां तरह को को नहीं मिल रहा है.निगम नेता प्रतिपक्ष मीनल चौबे ने बताया कि लगभग 12 करोड़ की लागत से एक स्विमिंग पूल बनाया गया था , निगम को इनका मेंटेनेंस करना है ,लेकिन आज इसका हालत जाकर आप देखिए उसकी शुरुआत भी नहीं हो पाई है. कोई उसकी सुध बुध लेने वाला नहीं है.लेकिन जनता के पैसे का इस प्रकार दुरुपयोग हमने कभी नहीं देखा है.र्तमान के महापौर को पता ही नहीं होगा कि ऐसा स्विमिंग पूल है ,जिसकी देखरेख उन्हें करना  हैं.यह बहुत ही आश्चर्य की बात है कि वर्तमान सरकार की कोई उपलब्धि ही नहीं है ,मगर कोई पूर्ववर्ती सरकार की संपत्तियों को सरकार सरकार की उपलब्धियों को मेंटेन करें तो यहां रायपुर शहर की उपलब्धि मानेगी, यहां बहुत ही शर्मनाक बात है कि कुछ करना नहीं है जो पहले का बना है,सरकारी संपत्ति है उसकी देखरेख नहीं कर पा रहे तो रायपुर शहर की जनता आप को माफ नहीं करेगी.

इधर महापौर एजाज ढेबर कहना है कि कोई चीज बीमार है तो प्रॉपर हॉस्पिटल जाने पर उसका इलाज होगा. आप लोगों के माध्यम से पता चल रहा है कि डाइविंग जहां करते हैं वो स्थल खराब है. यह जिसने ठेका मिला है उन्हें बताना था ,वही जो टेंडर चला रहा है उसको या तो डाइविंग की जरूरत नहीं पड़ती होगी, उसको आकर बताना था, आपको दर्द हो रहा है वहां जाकर आप इलाज कराएंगे तो दवाई मिलेगी.अभी आप लोगों के माध्यम से पता चल रहा है ,अगर यहां पहले ही पता चल जाता तो ठीक कर लेते ,इसे जल्द ही ठीक कर लिया जाएगा, क्योंकि वहां से अच्छे बच्चे भी निकल रहे हैं ,लोग जीत कर भी आ रहे हैं. अब हम चाहते हैं कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बच्चे अपने पहचान को बना सके. हम चाहते कि वहां डाइविंग अच्छा हो और स्विमिंग भी अच्छा बने.

गौरतलब है कि किसी भी स्विमिंग पूल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तभी माना जाता है ,जब यह डाइविंग के लिए एरिया और वहां वर्किंग कंडीशन में हो ,ऐसे में यहां डाइविंग एरिया तो बनाया गया है लेकिन इसकी हालत बदतर है. इसकी वजह से इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर का नहीं कहा जा सकता. वह 5 वर्ष बाद भी इसे सिर्फ नाम का अंतरराष्ट्रीय पूल कहा जा रहा है ,इसकी अधिकारिक घोषणा नहीं हुई है.

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