Kawardha News: जिले में 5 बैगा बच्चों की मौत से हड़कंप, मामले में कांग्रेस ने बनाई जांच समिति
कुपोषित बच्चों को अस्पताल में कराया गया भर्ती
नंदनी कुमान गांव में पांच बच्चों की मौत के बाद बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण और ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। प्रशासनिक और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव पहुंचकर बच्चों की स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान कुपोषण से प्रभावित बच्चों की पहचान कर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।
जानकारी के मुताबिक, अस्पताल में भर्ती बच्चों को चिकित्सकों की निगरानी में रखा गया है और उनके उपचार के साथ पोषण संबंधी देखभाल भी की जा रही है। हालांकि, पांचों बच्चों की मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि विस्तृत जांच और चिकित्सकीय रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी।
स्वास्थ्य सेवाओं और पोषण व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना ने आदिवासी बहुल क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं, पोषण आहार और बच्चों की नियमित निगरानी की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। सवाल यह भी उठ रहा है कि यदि क्षेत्र में स्वास्थ्य शिविर और नियमित जांच की व्यवस्था थी, तो बच्चों की स्थिति गंभीर होने से पहले प्रभावी कदम क्यों नहीं उठाए जा सके।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से क्षेत्र में समय-समय पर स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जाने की बात कही गई है। दूसरी ओर, आदिवासी समुदाय से जुड़े नेताओं ने स्वास्थ्य शिविरों के संचालन में कथित लापरवाही और सरकारी राशि के दुरुपयोग के आरोप लगाए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
कांग्रेस ने बनाई सात सदस्यीय जांच समिति
मामले को लेकर छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने सात सदस्यीय जांच समिति गठित की है। समिति का नेतृत्व मोहला-मानपुर विधायक इंद्रशाह मंडावी करेंगे। समिति में विधायक सावित्री मंडावी, जनक ध्रुव, हर्षिता स्वामी बघेल, पूर्व विधायक भानुप्रताप सिंह, ममता चंद्राकर और कवर्धा जिला कांग्रेस अध्यक्ष नवीन जायसवाल को शामिल किया गया है। समिति गांव का दौरा कर प्रभावित परिवारों, ग्रामीणों और संबंधित अधिकारियों से बातचीत करेगी। इसके बाद मामले की वास्तविक स्थिति का पता लगाकर अपनी रिपोर्ट प्रदेश कांग्रेस कमेटी को सौंपेगी।
स्वास्थ्य और महिला एवं बाल विकास विभाग की भूमिका पर सवाल
बच्चों की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग के साथ महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में है। ग्रामीण इलाकों में बच्चों को समय पर उपचार, नियमित स्वास्थ्य परीक्षण और पर्याप्त पोषण उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी से जुड़े पहलुओं की जांच जरूरी मानी जा रही है। मामले में यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि मृत बच्चों को पहले से कोई बीमारी थी या नहीं, उनकी पोषण संबंधी स्थिति क्या थी और उन्हें समय पर स्वास्थ्य सेवाएं मिल पाई थीं या नहीं। इन सवालों के जवाब जांच और संबंधित मेडिकल रिकॉर्ड से ही स्पष्ट हो सकेंगे।
प्रभावित परिवारों को सहायता और निष्पक्ष जांच की जरूरत
नंदनी कुमान की घटना ने एक बार फिर आदिवासी अंचलों में बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण संबंधी चुनौतियों को सामने ला दिया है। फिलहाल, कुपोषित बच्चों का उपचार जारी है और कांग्रेस की जांच समिति भी मामले की पड़ताल करेगी।
Kawardha News: अब सबसे अहम है कि पांचों बच्चों की मौत के कारणों की निष्पक्ष जांच हो, प्रभावित परिवारों को आवश्यक सहायता मिले और जरूरतमंद बच्चों को समय पर बेहतर इलाज व पोषण उपलब्ध कराया जाए। साथ ही, जांच में यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है, तो संबंधित जिम्मेदारी तय कर भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।




