Meerut Snake Murder Case: एक और प्रेमी जोड़े को मिली सजा-ए-मौत, पति की हत्या कर सांप से डसवाने वाले रविता और अमरदीप को कोर्ट ने सुनाई फांसी
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनी गई दोषियों की बात
सजा सुनाने से पहले अदालत ने रविता और अमरदीप का पक्ष वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुना। फैसले के दौरान न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि जघन्य अपराध केवल शव के टुकड़े करने तक सीमित नहीं होते, बल्कि विश्वास और पारिवारिक रिश्तों को तोड़ने वाले अपराध भी गंभीर हो सकते हैं।
अदालत ने मामले की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए दोनों दोषियों को फांसी की सजा सुनाई। जेल प्रशासन के मुताबिक, फैसला सुनाए जाने के बाद दोनों रो रहे थे। फिलहाल उन्हें पुरानी बैरक में रखा गया है। फैसले की प्रति मिलने के बाद उन्हें नियमानुसार सजायाफ्ता कैदियों की बैरक में स्थानांतरित किया जाएगा।
पति की हत्या को सांप के काटने का मामला दिखाने की कोशिश
मामले के अनुसार, 17 अप्रैल 2025 की रात रविता ने अमरदीप के साथ मिलकर अपने पति अमित कश्यप की कथित तौर पर गला घोंटकर हत्या कर दी थी। इसके बाद मौत को सांप के काटने से हुई घटना दिखाने के लिए बिस्तर पर सांप छोड़ दिया गया था। पुलिस ने जांच के बाद दोनों के खिलाफ मामला दर्ज किया और वारदात के करीब 60 दिन बाद आरोपपत्र दाखिल किया। सुनवाई के दौरान अदालत में कई गवाहों के बयान दर्ज किए गए। 7 अक्टूबर को अदालत ने रविता और अमरदीप को दोषी ठहराया था।
अदालत ने रिश्तों और भरोसे का किया जिक्र
फैसले के दौरान न्यायाधीश ने पति-पत्नी के रिश्ते, आपसी भरोसे और वैवाहिक जिम्मेदारियों का उल्लेख किया। अदालत की टिप्पणी में करवाचौथ और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं का भी जिक्र आया। अदालत ने माना कि इस तरह के अपराध का असर केवल मृतक तक सीमित नहीं रहता, बल्कि परिवार और उससे जुड़े लोगों पर भी गहरा प्रभाव पड़ता है। मामले में दोषियों के तीन बच्चों के भविष्य और उनके भरण-पोषण का विषय भी चर्चा में आया।
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मेरठ में हाल के दिनों में दो चर्चित मामलों में मृत्युदंड
Meerut Snake Murder Case: मेरठ में हाल ही में चर्चित नीले ड्रम हत्याकांड में मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल को भी मृत्युदंड सुनाए जाने की खबर सामने आई थी। इसके बाद रविता और अमरदीप को सजा सुनाए जाने से शहर में दोनों मामलों की चर्चा हो रही है। मेरठ के जिला शासकीय अधिवक्ता केके चौबे ने कहा कि इन फैसलों से गंभीर अपराधों के प्रति न्यायिक सख्ती का संदेश जाता है। उन्होंने कहा कि अपराधों की गंभीरता का आकलन केवल शव के साथ की गई क्रूरता से नहीं, बल्कि अपराध की पूरी परिस्थितियों और उसके प्रभाव से भी किया जाना चाहिए।




