रायपुर। CG Coal Scam: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कोल लेवी मामले में आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) की नई चार्जशीट में कथित अवैध वसूली और उससे जुड़े वित्तीय लेन-देन को लेकर कई अहम दावे किए गए हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक, जब्त डायरियों में दर्ज कुछ प्रविष्टियों के आधार पर 104 करोड़ 20 लाख रुपये के कथित लेन-देन की जानकारी सामने आई है। चार्जशीट में इस रकम को रायपुर स्थित राजीव भवन तक पहुंचाए जाने के दावे का भी उल्लेख किया गया है।
EOW ने मामले में करीब 9,500 पन्नों का छठा पूरक चालान विशेष न्यायालय में पेश किया है। इसमें डायरियों में दर्ज हिसाब-किताब, गवाहों के बयान, डिजिटल साक्ष्य और कथित वित्तीय लेन-देन से संबंधित दस्तावेज शामिल किए गए हैं। जांच एजेंसी के इन दावों पर अब न्यायालय में विचार किया जाएगा।
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डायरियों में मिले करोड़ों के लेन-देन के संकेत
EOW के अनुसार, अक्टूबर 2020 से जून 2022 के बीच जब्त डायरियों में ‘भवन’, ‘BHAWAN’ और ‘C PARTY’ जैसे शब्दों के साथ 32 प्रविष्टियां दर्ज मिलीं। एजेंसी ने इन प्रविष्टियों का कुल हिसाब 104.20 करोड़ रुपये बताया है।
चार्जशीट में ‘C PARTY KO’, ‘C PARTY BHAWAN ME’ और ‘भवन में दिया गया’ जैसे उल्लेख भी किए गए हैं। जांच एजेंसी का दावा है कि संबंधित व्यक्तियों के बयानों में ‘भवन’ का संबंध रायपुर स्थित राजीव भवन से जोड़ा गया है। डायरियों में अलग-अलग तारीखों पर बड़ी रकम दर्ज होने की बात भी सामने आई है। EOW के मुताबिक, कुछ प्रविष्टियों में एक ही दिन में करोड़ों रुपये के लेन-देन का हिसाब मिला है। एजेंसी ने इन रिकॉर्ड का मिलान संबंधित लोगों के बयानों से करने की बात कही है।
राजीव भवन में नकदी पहुंचाने को लेकर गवाहों के बयान
चार्जशीट में कुछ गवाहों के बयान भी शामिल हैं, जिनमें कथित तौर पर नकदी से भरे बैग कार्यालय परिसर में लाए जाने का जिक्र किया गया है। एजेंसी के अनुसार, गवाहों ने एक बार में आठ से दस काले बैग आने और उन्हें एक कमरे तक पहुंचाने की बात कही है।
जांच में देवेंद्र डडसेना का नाम भी सामने आया है। चार्जशीट में उन्हें राम गोपाल अग्रवाल का निजी सहायक बताया गया है। गवाहों के बयानों के मुताबिक, कार्यालय के एक हिस्से में बैग रखे जाने और उस दौरान कर्मचारियों को वहां से हटाए जाने का भी उल्लेख है। EOW का दावा है कि डायरियों में दर्ज रकम और तारीखों की तुलना गवाहों के बयानों से की गई है। हालांकि, इन बयानों और दस्तावेजों की प्रमाणिकता का निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगा।
25 रुपये प्रति टन वसूली का आरोप
कोल लेवी मामले की जांच में आरोप लगाया गया है कि कोयला परिवहनकर्ताओं से प्रति टन 25 रुपये की दर से कथित अवैध वसूली की जाती थी। जांच एजेंसियों ने 15 जुलाई 2020 को जारी आदेश के बाद ई-परमिट प्रक्रिया में हुए बदलाव को भी जांच का हिस्सा बनाया है। EOW के मुताबिक, कथित वसूली की रकम विभिन्न जिलों से रायपुर लाई जाती थी। इसके बाद रकम का हिसाब रखकर आगे वितरण किया जाता था। चार्जशीट में इस कथित नेटवर्क से जुड़े दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों का भी उल्लेख किया गया है।
चुनावी गतिविधियों और नेताओं से जुड़े लेन-देन की जांच
चार्जशीट में कारोबारी सूर्यकांत तिवारी और कुछ कांग्रेस नेताओं के बीच हुई कथित व्हाट्सऐप बातचीत का भी जिक्र है। जांच एजेंसी ने इन बातचीत और कथित वित्तीय लेन-देन को अपनी जांच का हिस्सा बनाया है।
पूर्व विधायक चंद्रदेव प्रसाद राय के संबंध में 46 लाख रुपये प्राप्त करने का आरोप दर्ज होने की बात कही गई है। इसी तरह कांग्रेस नेता विनोद तिवारी के मामले में करीब 1.87 करोड़ रुपये और आरपी सिंह के संबंध में लगभग 2.01 करोड़ रुपये के कथित लेन-देन का उल्लेख किया गया है। इन रकमों के इस्तेमाल को लेकर एजेंसी ने चुनावी गतिविधियों और अन्य खर्चों से जुड़े आरोप लगाए हैं। इन दावों को अदालत में साबित किया जाना अभी बाकी है।
जमीन, फ्लैट और वाशरी में निवेश की पड़ताल
जांच एजेंसी ने कथित वसूली से प्राप्त रकम को संपत्तियों में निवेश किए जाने की आशंका की भी जांच की है। चार्जशीट में जमीन, फ्लैट, वाशरी और विभिन्न फर्मों के माध्यम से हुए कथित वित्तीय लेन-देन का विवरण शामिल है। EOW के अनुसार, कुछ मामलों में संपत्ति खरीद, नकदी के इस्तेमाल और फर्मों के जरिए रकम के हस्तांतरण की जांच की गई है। एजेंसी का दावा है कि इन दस्तावेजों से कथित वसूली की रकम के इस्तेमाल से जुड़ी कड़ियों का पता लगाने का प्रयास किया गया है।
पहले भी दाखिल हो चुके हैं पांच पूरक चालान
EOW इस मामले में इससे पहले एक मुख्य चालान और पांच पूरक चालान अदालत में पेश कर चुकी है। अब छठे पूरक चालान के माध्यम से अतिरिक्त दस्तावेज और साक्ष्य प्रस्तुत किए गए हैं। एजेंसी के मुताबिक, मामले से जुड़े अन्य संदिग्धों और शेष लेन-देन की जांच अभी जारी है।
CG Coal Scam: जांच एजेंसियों ने पूरे प्रकरण में 570 करोड़ रुपये से अधिक की कथित अवैध वसूली का आरोप लगाया है। ताजा चार्जशीट में सामने आए दावों के बाद मामले की सुनवाई और जांच की आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। आरोपों पर अंतिम फैसला न्यायालय करेगा।




