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Hartalika Teej 2026: कब मनाई जाएगी हरतालिका तीज, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा की पूरी विधि

Hartalika Teej 2026: हिंदू धर्म में हरतालिका तीज का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इसे कई जगहों पर बड़ी तीज के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता के अनुसार, विवाहित महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुखी दांपत्य जीवन की कामना से इस दिन कठिन निर्जला व्रत रखती हैं। इस दौरान भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है।

हरतालिका तीज का पर्व खासतौर पर उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान और झारखंड समेत कई राज्यों में श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। वहीं आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में इसे गौरी हब्बा के नाम से जाना जाता है।

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इस बार गणेश चतुर्थी के साथ पड़ रही तीज

आमतौर पर हरतालिका तीज का पर्व गणेश चतुर्थी से एक दिन पहले आता है। लेकिन 2026 में दोनों त्योहार एक ही तारीख को पड़ रहे हैं। ऐसा तृतीया और चतुर्थी तिथि के एक ही दिन पड़ने के कारण हो रहा है। पंचांग के अनुसार, इस वर्ष हरतालिका तीज का व्रत 14 सितंबर 2026, सोमवार को रखा जाएगा।

पूजा का शुभ समय:

सुबह 6:05 बजे से 7:06 बजे तक। इस दौरान शिव-पार्वती की पूजा करना विशेष शुभ माना जाता है।

हरतालिका तीज की पूजा कैसे करें?

हरतालिका तीज पर सुबह का समय पूजा के लिए उत्तम माना जाता है। यदि किसी कारणवश सुबह पूजा संभव न हो तो प्रदोष काल में भी पूजा की जा सकती है। पूजा की तैयारी के लिए सबसे पहले स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनें। इसके बाद पूजा स्थल को साफ कर एक पीले वस्त्र पर बालू या मिट्टी से बनाई गई भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमाएं स्थापित करें।

इसके बाद विधि-विधान से शिव-पार्वती का पूजन करें। पूजा के दौरान हरतालिका तीज की व्रत कथा सुनना या पढ़ना भी महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, व्रत रखने वाली महिलाएं पूरे दिन अन्न और जल का त्याग करती हैं और रात में जागरण करती हैं। अगले दिन सूर्योदय से पहले स्नान कर दोबारा भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने के बाद व्रत का पारण किया जाता है।

हरतालिका तीज व्रत के प्रमुख नियम

  • इस व्रत में अन्न और पानी का सेवन नहीं किया जाता। हालांकि स्वास्थ्य संबंधी परेशानी वाली या गर्भवती महिलाएं अपनी स्थिति के अनुसार फलाहार कर सकती हैं।
  • तीज की रात जागरण करने की धार्मिक परंपरा है, इसलिए रात में सोने से बचने की मान्यता है।
  • रात में पूजा स्थल या मंदिर में अखंड दीपक जलाने की परंपरा है।
  • महिलाएं इस दिन पारंपरिक रूप से 16 श्रृंगार करती हैं।
  • धार्मिक मान्यता है कि एक बार हरतालिका तीज का व्रत शुरू करने के बाद इसे लगातार करना चाहिए और बीच में व्रत छोड़ने से बचना चाहिए।

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क्यों खास है हरतालिका तीज?

Hartalika Teej 2026: धार्मिक मान्यता के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तप किया था। हरतालिका तीज का व्रत इसी शिव-पार्वती भक्ति और दांपत्य सुख से जुड़ा माना जाता है। महिलाएं इस दिन अपने पति की दीर्घायु, परिवार की खुशहाली और वैवाहिक जीवन में सुख-शांति की कामना करती हैं।

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