Nag Punchmi 2026: नाग पंचमी आज, आधी रात खुले नागचंद्रेश्वर मंदिर के कपाट, साल में एक बार ही होते हैं दर्शन

उज्जैन। Nag Punchmi 2026: आज सावन का तीसरा सोमवार है और इसी के साथ ही नाग पंचमी का भी पर्व है। कहा जा रहा है की 23 साल बाद ऐसा शुभ संयोग बन रहा है। जिससे की इसदिन का महत्व काफी बढ़ गया है। वहीं बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में नागपंचमी का पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। इस बार सावन सोमवार और नागपंचमी के एक साथ पड़ने से धार्मिक महत्व और बढ़ गया है। महाकालेश्वर मंदिर परिसर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिल रही है।
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आधी रात को खुले नागचंद्रेश्वर मंदिर के कपाट
महाकालेश्वर मंदिर की ऊपरी मंजिल पर स्थित प्रसिद्ध नागचंद्रेश्वर मंदिर के कपाट परंपरा के अनुसार रात 12 बजे खोले गए। कहा जाता है की यह मंदिर साल में एक बार नागपंचमी के दिन ही खुलता है। मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना के बाद भक्तों के लिए दर्शन शुरू किए गए। नागचंद्रेश्वर के दर्शन का सिलसिला करीब 24 घंटे तक जारी रहेगा। कपाट खुलते ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन के लिए पहुंचने लगे। भक्तों की भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रशासन और पुलिस की ओर से व्यवस्थाएं की गई हैं।
नागचंद्रेश्वर की दुर्लभ प्रतिमा बनी आस्था का केंद्र
नागचंद्रेश्वर मंदिर में भगवान शिव और माता पार्वती की एक प्राचीन एवं दुर्लभ प्रतिमा स्थापित है। प्रतिमा में दोनों को शेषनाग की शैया पर विराजमान दिखाया गया है। भगवान गणेश और भगवान कार्तिकेय भी इस प्रतिमा का हिस्सा हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नागपंचमी के दिन भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन और पूजा करने से भगवान शिव-पार्वती की कृपा प्राप्त होती है तथा सर्प भय से मुक्ति मिलने की मान्यता है।
11वीं शताब्दी की मानी जाती है प्रतिमा
नागचंद्रेश्वर मंदिर में स्थापित प्रतिमा को 11वीं शताब्दी के परमार काल से जोड़ा जाता है। स्थानीय मान्यता के अनुसार यह प्रतिमा नेपाल से उज्जैन लाई गई थी। प्राचीन प्रतिमा और मंदिर की विशेष परंपरा के कारण नागपंचमी के अवसर पर यहां देशभर से श्रद्धालु पहुंचते हैं।
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नागपंचमी और सावन सोमवार का विशेष संयोग
Nag Punchmi 2026: इस बार नागपंचमी के साथ सावन का सोमवार होने से उज्जैन के शिवालयों में भक्तों की संख्या और बढ़ गई है। श्रद्धालु भगवान महाकाल के दर्शन के साथ नागचंद्रेश्वर मंदिर में भी पूजा-अर्चना कर रहे हैं। नागपंचमी पर नाग देवता को दूध अर्पित करने की परंपरा भी निभाई जा रही है। भक्त नाग प्रतिमाओं पर दूध चढ़ाकर सुख-समृद्धि और परिवार की सुरक्षा की कामना कर रहे हैं। महाकाल की नगरी में आधी रात से शुरू हुई आस्था की यह लहर पूरे दिन जारी रहने वाली है, जहां हर-हर महादेव और नागचंद्रेश्वर के जयकारों से मंदिर परिसर भक्तिमय बना हुआ है।




