Sawan 2026: कल से शुरू होगा भोलेनाथ की आराधना का महापर्व सावन का महीना, जानिए पूजा के नियम और चारों सावन सोमवार की सही तारीख
Sawan 2026। भगवान शिव को समर्पित पवित्र सावन मास की शुरुआत 30 जुलाई से होने जा रही है। हिंदू धर्म में सावन को शिव भक्ति का सबसे महत्वपूर्ण महीना माना जाता है। इस पूरे माह में शिवालयों में विशेष पूजा-अर्चना, रुद्राभिषेक, जलाभिषेक और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन होगा। देशभर में कांवड़ यात्रा की भी धूम रहेगी, जहां लाखों शिवभक्त पवित्र नदियों से जल लाकर शिवलिंग का अभिषेक करेंगे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन मास में भगवान शिव और माता पार्वती पृथ्वी लोक पर विराजमान रहते हैं और सच्चे मन से पूजा करने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। यही कारण है कि इस महीने मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है।
इस बार पड़ेंगे चार सावन सोमवार
सावन के सोमवार का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि इन दिनों भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा करने और व्रत रखने से सुख, समृद्धि और मनचाहा फल प्राप्त होता है। इस वर्ष सावन में कुल चार सोमवार पड़ेंगे
पहला सोमवार: 3 अगस्त
दूसरा सोमवार: 10 अगस्त
तीसरा सोमवार: 17 अगस्त
चौथा सोमवार: 24 अगस्त
शिव पूजा में इन बातों का रखें विशेष ध्यान
धार्मिक ग्रंथों और मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव की पूजा करते समय कुछ नियमों का पालन करना आवश्यक माना गया है।
शिवलिंग पर हल्दी और कुमकुम अर्पित नहीं करना चाहिए, क्योंकि इन्हें सौभाग्य और श्रृंगार का प्रतीक माना जाता है।
तुलसी के पत्ते भगवान शिव को नहीं चढ़ाए जाते। मान्यता है कि जालंधर वध के बाद तुलसी ने शिव पूजा में अपने पत्तों के उपयोग को वर्जित कर दिया था।
पूजा में केतकी का फूल अर्पित नहीं करना चाहिए।
शिवलिंग पर हमेशा संपूर्ण और तीन पत्तियों वाले बेलपत्र ही चढ़ाएं। कटे-फटे या खंडित बेलपत्र अर्पित करना शुभ नहीं माना जाता।
जलाभिषेक और रुद्राभिषेक का विशेष महत्व
Sawan 2026: धार्मिक मान्यता है कि भगवान शिव अत्यंत भोले और शीघ्र प्रसन्न होने वाले देव हैं। श्रद्धा से अर्पित किया गया साधारण जल भी उन्हें प्रिय होता है। वहीं रुद्राभिषेक करने से जीवन की अनेक बाधाएं दूर होती हैं और नवग्रहों की अशुभता भी शांत होती है। मान्यता है कि शिव की कृपा से सुख, शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। सावन माह के दौरान श्रद्धालु पूरी आस्था और नियमों के साथ भगवान शिव की उपासना करते हैं। माना जाता है कि इस पावन महीने में सच्चे मन से की गई आराधना भक्तों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन और शुभ फल लेकर आती है।




