CG Vidhan Sabha Session: प्रश्नकाल में उठा अमानक प्रतिबंधित दवा खरीदी का मामला, यूनिक्योर इंडिया लिमिटेड को लेकर सरकार से पूछे गए सवाल
रायपुर। CG Vidhan Sabha Session: छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र का आज तीसरा दिन है। ऐसे में प्रश्नकाल के दौरान अमानक और प्रतिबंधित दवाओं की खरीद का मामला जोरदार ढंग से उठा। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अनुपस्थिति में कांग्रेस विधायक अटल श्रीवास्तव ने स्वास्थ्य विभाग और छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन (CGMSC) से जुड़े कई गंभीर सवाल सदन में रखे।
विधायक अटल श्रीवास्तव ने पूछा कि क्या यह सही है कि गुजरात मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने दवा निर्माता कंपनी मेसर्स यूनिक्योर इंडिया लिमिटेड की एस्पिरिन गैस्ट्रो-रेजिस्टेंट टैबलेट्स (75 एवं 150 मिलीग्राम) को गुणवत्ता मानकों पर विफल पाए जाने के बाद ब्लैकलिस्ट किया था। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि क्या इसकी जानकारी छत्तीसगढ़ शासन और CGMSC को मिली थी तथा इसके बावजूद कंपनी को दवा आपूर्ति का आदेश क्यों जारी किया गया। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि संबंधित कंपनी से कितनी मात्रा में दवाएं खरीदी गईं, कितना भुगतान किया गया, क्या खरीद से पहले अनिवार्य बैच परीक्षण कराया गया था और इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई।
इस पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने सदन में जवाब देते हुए कहा कि यह सही है कि गुजरात मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने यूनिक्योर इंडिया लिमिटेड की एस्पिरिन गैस्ट्रो-रेजिस्टेंट टैबलेट्स (75 एवं 150 मिलीग्राम) को गुणवत्ता मानकों पर विफल पाए जाने के कारण ब्लैकलिस्ट किया था। इस संबंध में कंपनी की ओर से 25 मार्च 2026 को CGMSC को सूचना भी दी गई थी।
हालांकि मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह कहना सही नहीं है कि छत्तीसगढ़ में उसी प्रतिबंधित दवा की खरीद या आपूर्ति को मंजूरी दी गई थी। उन्होंने बताया कि CGMSC ने कंपनी को एस्पिरिन टैबलेट्स IP 75 मिलीग्राम (अनकोटेड टैबलेट) की आपूर्ति का आदेश दिया था, जो इंडियन फार्माकोपिया-2022 के अनुसार गुजरात में प्रतिबंधित की गई गैस्ट्रो-रेजिस्टेंट टैबलेट्स से अलग दवा है।
CG Vidhan Sabha Session: स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि दोनों दवाएं तकनीकी रूप से अलग हैं। इसके बावजूद जनहित और एहतियात के तौर पर कंपनी से सूचना प्राप्त होने के बाद CGMSC ने संबंधित दवा के सभी क्रय आदेश और दर अनुबंध (रेट कॉन्ट्रैक्ट) तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए थे।मंत्री ने कहा कि विभाग ने सावधानी बरतते हुए आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई की है और दवा खरीद प्रक्रिया में जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।
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