Electricity Shortage Risk: AC की बढ़ती मांग ने बढ़ाई टेंशन, 2028 के बाद गहरा सकता है पावर संकट, रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
Electricity Shortage Risk: भीषण गर्मी के बीच देशभर में एयर कंडीशनर (AC) की बिक्री तेजी से बढ़ रही है। गर्मी से बचने के लिए आज कल हर कोई अपनों घरों में एसी लगवाता है, लेकिन विशेषज्ञों की मानें तो आने वाले वर्षों में यही बढ़ती मांग भारत के बिजली ढांचे पर भारी दबाव डाल सकती है। एक नई स्टडी में चेतावनी दी गई है कि अगर समय रहते सख्त ऊर्जा मानक लागू नहीं किए गए, तो देश को बड़े स्तर पर बिजली संकट और ब्लैकआउट जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
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रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हर साल करीब 1 से 1.5 करोड़ नए AC खरीदे जा रहे हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया की रिसर्च बताती है कि, एक एयर कंडीशनर, LED बल्ब की तुलना में लगभग 100 से 150 गुना अधिक बिजली खर्च करता है। वहीं अनुमान है कि अगले 10 वर्षों में देश में 13 से 15 करोड़ नए AC लगाए जाएंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि हालात ऐसे ही रहें, तो 2028 के बाद बिजली की भारी कमी शुरू हो सकती है।
रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले समय में रात के दौरान होने वाली कुल बिजली खपत का लगभग एक-तिहाई हिस्सा अकेले AC इस्तेमाल करेंगे। अध्ययन में बताया गया है कि AC के बढ़ते उपयोग की वजह से देश में बिजली की मांग 2030 तक 120 गीगावाट और 2035 तक 180 गीगावाट तक पहुंच सकती है। ऐसे में पर्याप्त तैयारी नहीं होने पर बड़े पैमाने पर पावर कट और बिजली बाधित होने की आशंका बढ़ जाएगी।
शोधकर्ताओं ने इस चुनौती से निपटने के लिए ऊर्जा दक्ष (Energy Efficient) AC को बढ़ावा देने पर जोर दिया है। उनका कहना है कि ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (BEE) को न्यूनतम ऊर्जा प्रदर्शन मानकों में जल्द बड़े बदलाव करने चाहिए। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि 2030 तक बाजार में बिकने वाले सभी बेसिक AC की दक्षता कम से कम मौजूदा 5-स्टार रेटिंग के बराबर होनी चाहिए। वहीं 2033 तक इसे बढ़ाकर ISEER 6.7 स्तर तक ले जाने की सिफारिश की गई है।
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Electricity Shortage Risk: विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ये नियम लागू किए जाते हैं, तो इसका फायदा उपभोक्ताओं, सरकार और पूरे देश को मिलेगा। ज्यादा ऊर्जा बचाने वाले AC इस्तेमाल होने से लोगों के बिजली बिल में बड़ी कमी आएगी। अनुमान है कि 2028 से 2035 के बीच उपभोक्ता करीब 2.48 लाख करोड़ रुपये तक की बचत कर सकते हैं। इसके साथ ही बिजली की मांग कम होने से सरकार को नए पावर प्लांट और बिजली ढांचे पर होने वाले भारी खर्च में भी राहत मिलेगी।




