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मराठा आरक्षण आंदोलन: मुंबई के आजाद मैदान में दूसरे दिन भी मनोज जरांगे का अनशन जारी, सुविधाओं की कमी पर नाराज़गी

“यह हमारी आखिरी लड़ाई है” – जरांगे की चेतावनी, कहा- दो दिन में पानी भी छोड़ दूंगा अगर सरकार ने फैसला टाला

मुंबई : मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे ने शनिवार को मुंबई के ऐतिहासिक आजाद मैदान में लगातार दूसरे दिन अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल जारी रखी। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि जब तक मराठा समुदाय की मांगें पूरी नहीं होतीं, वह आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे। जरांगे (43) ने यहां तक कह दिया कि अगर सरकार शिक्षा और नौकरियों में आरक्षण को लेकर अपने फैसले में देर करेगी तो वह अगले दो दिनों में पानी पीना भी बंद कर देंगे।

बरसात और सुविधाओं की कमी से मुश्किलें
आंदोलनकारियों को रातभर हुई बारिश से मैदान पर कीचड़ और अव्यवस्था का सामना करना पड़ा। समर्थकों ने शौचालयों में पानी की कमी और अन्य बुनियादी सुविधाओं की अनुपलब्धता को लेकर नाराज़गी जताई। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) शौचालय और पेयजल जैसी न्यूनतम सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं करा पा रही है। कई समर्थकों को मजबूरी में छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस और वाहनों में शरण लेनी पड़ी।

जरांगे की मांग और आरोप

जरांगे की मुख्य मांग है कि सभी मराठाओं को नौकरी और शिक्षा में आरक्षण का लाभ देने के लिए अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के तहत कुनबी के रूप में मान्यता दी जाए। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि वह मराठा और ओबीसी समुदाय को आपस में बांटने की कोशिश कर रही है।
जरांगे ने कहा, “हमने कभी नहीं कहा कि ओबीसी का कोटा घटाकर हमें दें। हम सिर्फ अपना हक मांग रहे हैं। यह हमारी आखिरी लड़ाई है।”

सरकार का रुख
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शुक्रवार को बयान दिया था कि सरकार मराठा समुदाय से जुड़े मुद्दों को हल करने के लिए सकारात्मक है, लेकिन यह समाधान केवल सामाजिक और आर्थिक पहलुओं तक सीमित होगा, राजनीतिक आरक्षण इसमें शामिल नहीं होगा।
उन्होंने बताया कि मंत्रिमंडलीय उप-समिति जरांगे की मांगों पर चर्चा कर रही है और संवैधानिक ढांचे के भीतर इसका हल ढूंढने की कोशिश की जाएगी।

विपक्ष का समर्थन
विपक्षी दलों के कई सांसद और विधायक शनिवार को आजाद मैदान पहुंचे और जरांगे से मुलाकात कर आंदोलन को समर्थन दिया। आंदोलनकारियों का कहना है कि अगर सरकार ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाए तो आने वाले दिनों में और भी मराठा समुदाय के लोग मुंबई पहुंचेंगे।

पिछला संघर्ष और पृष्ठभूमि
इससे पहले जनवरी 2024 में भी जरांगे ने भूख हड़ताल की थी, जो भाजपा विधायक सुरेश धस के हस्तक्षेप के बाद छठे दिन खत्म हुई थी। वर्ष 2023 के बाद से यह उनका सातवां बड़ा आंदोलन है। जरांगे ने पहले ही चेतावनी दी थी कि अगर सरकार ने वादों पर तेजी से अमल नहीं किया तो वह मुंबई में बड़े आंदोलन का नेतृत्व करेंगे।

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