SHOCKING: विश्व प्रसिद्ध देवघर श्रावणी मेले के पेड़े में 15% मिट्टी की मिलावट! जांच रिपोर्ट में हुआ खुलासा, खाद्य सुरक्षा विभाग लेगा एक्शन
रांची लैब ने की पुष्टि, 69 सैंपल में पहली बार सिंथेटिक खोवा नहीं, बल्कि मिट्टी पाई गई; श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य से खिलवाड़ पर होगी कड़ी कानूनी कार्रवाई

देवघर/रांची: झारखंड के प्रसिद्ध देवघर श्रावणी मेले में प्रसाद के रूप में बेचे जा रहे पेड़े को लेकर एक गंभीर अनियमितता सामने आई है। राज्य खाद्य जाँच प्रयोगशाला, रांची ने पुष्टि की है कि मेले के दौरान जब्त किए गए पेड़े के सैंपल में मिट्टी की मिलावट पाई गई है। धार्मिक आस्था से जुड़े इस मेले में प्रसाद की गुणवत्ता से हुई छेड़छाड़ ने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है।
15% तक मिट्टी की मिलावट का खुलासा
श्रावणी मेले के दौरान खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने जुलाई माह में एक विशेष अभियान चलाते हुए पेड़े की कई दुकानों पर छापेमारी की थी। इस दौरान 69 सैंपल इकट्ठे कर उन्हें परीक्षण के लिए रांची स्थित लैब भेजा गया था।
राज्य खाद्य विश्लेषक चतुर्भुज मीणा ने बताया कि—
“यह पहली बार है जब श्रावणी मेले से लिए गए पेड़े के सैंपल में मिट्टी की मिलावट पाई गई है। पहले के मामलों में सिंथेटिक खोवा या अन्य नकली पदार्थों की शिकायतें सामने आती थीं, लेकिन मिट्टी की मिलावट अत्यंत गंभीर है।”
जांच रिपोर्ट के अनुसार 100 ग्राम पेड़े में 15 प्रतिशत तक मिट्टी मिली हुई पाई गई है। माना जा रहा है कि पेड़े का वजन बढ़ाने तथा लागत घटाने के उद्देश्य से यह मिलावट की गई थी।
कानूनी कार्रवाई की तैयारी
जाँच रिपोर्ट 5 दिसंबर 2025 को जारी की गई और इसे तुरंत उच्च अधिकारियों तथा देवघर जिले के फूड सेफ्टी अफसर को भेज दिया गया।
कार्रवाई का आधार
रिपोर्ट के आधार पर खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम के तहत दोषी दुकानदारों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। इसमें भारी जुर्माना, लाइसेंस निलंबन और अन्य दंडात्मक कार्रवाई शामिल हो सकती है।
भक्तों के स्वास्थ्य पर बड़ा खतरा
पेड़े में इतनी अधिक मात्रा में मिट्टी की मिलावट पाचन तंत्र से संबंधित गंभीर समस्याएँ पैदा कर सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, मिट्टी में मौजूद सूक्ष्म कण शरीर में संक्रमण का कारण बन सकते हैं और लंबे समय में पेट संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ा सकते हैं।
गुणवत्ता निगरानी के निर्देश
प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि भविष्य में धार्मिक आयोजनों में बेचे जाने वाले प्रसाद और खाद्य पदार्थों की सख्त निगरानी की जाए। श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्राथमिकता होगी, ताकि आस्था के नाम पर किसी भी प्रकार का अनैतिक लाभ न उठाया जा सके।




