बाढ़ ने मचाई तबाही: बागमती के बाद लखनदेई भी उफनाई, हजारों परिवार विस्थापित
कई प्रखंडों में तटबंध टूटने और जलजमाव से जनजीवन अस्त-व्यस्त, एसडीआरएफ टीमों ने एक हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया

पटना : बिहार के सीतामढ़ी जिले में बाढ़ की स्थिति लगातार भयावह होती जा रही है। बागमती नदी के बाद अब लखनदेई नदी ने भी विकराल रूप धारण कर लिया है, जिससे औराई, गायघाट, कटरा व कुढ़नी प्रखंडों में जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। मूसलाधार बारिश से नदियों में उफान जारी है और बाढ़ का पानी सैकड़ों गांवों में घुस चुका है। प्रशासन द्वारा एसडीआरएफ की टीमों के साथ राहत कार्य तेज किया गया है।
औराई में संकट गहराया
औराई प्रखंड की 26 पंचायतें इस समय बाढ़ की चपेट में हैं। बागमती नदी के बाद अब लखनदेई नदी के उफान से बभनगामा, हरनीटोला, चहुंटा, मधुबन प्रताप, चैनपुर, महेश्वरा और कश्मीरी टोला समेत कई गांवों के लोग अपने घर छोड़कर ऊंचे एवं सुरक्षित स्थानों पर पहुंच गए हैं। बागमती बांध परियोजना के अंदर बसे सैकड़ों परिवार दो दिनों से संकट में हैं। खेतों में खड़ी धान की फसल जलमग्न हो चुकी है जबकि कई तटबंधों पर रिसाव और टूटने का खतरा मंडरा रहा है।
स्थानीय किसानों का कहना है कि अब तक पानी का स्तर इतना नहीं बढ़ा था, जिससे लोगों को राहत की उम्मीद थी, लेकिन अचानक बारिश ने हालात बिगाड़ दिए। सूचना है कि बेला-परिहार क्षेत्र से रातो नदी का पानी लखनदेई के रास्ते औराई की ओर बढ़ रहा है। यदि यह प्रवाह और तेज हुआ, तो उत्तरी पंचायतों की स्थिति और गंभीर होगी।
गायघाट में पांच सौ घर जलमग्न
गायघाट प्रखंड की छह पंचायतें बाढ़ से गंभीर रूप से प्रभावित हैं। जमालपुर कोदई, शिवदाहा, बरूआरी, कांटा पिरौछा उतरी और दक्षिणी पंचायतों के सैकड़ों घरों में पानी घुस चुका है। कई गांव जैसे मधुरपट्टी, पिरौछा और डुमरांव में लोग टापू जैसी स्थिति में फंसे हैं। तेज बहाव के कारण नाव सेवा बंद कर दी गई है जबकि कांटा बेनीबाद मार्ग पर आवागमन ठप है। सीओ के अनुसार, स्थिति की जानकारी वरीय अधिकारियों को दे दी गई है और राहत सामग्री की व्यवस्था की जा रही है।
कटरा में चार हजार घरों में घुसा पानी
कटरा प्रखंड का हाल भी गंभीर है। यहां बकुची, पतारी, गंगेया, माधोपुर भवानीपुर, नवादा, अनदामा और सोनपुर गांवों में लगभग चार हजार घर जलमग्न हैं। औराई-से-बेनीबाद मुख्य सड़क पर छह किलोमीटर लंबा हिस्सा पानी में डूब गया है, जिससे ग्रामीण पूरी तरह कट गए हैं। विद्युत आपूर्ति और संचार व्यवस्था बाधित हो चुकी है।
सीओ मधुमिता कुमारी ने बताया कि चार एसडीआरएफ टीमों और दर्जनों नावों की मदद से अब तक करीब एक हजार बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। प्रशासन ने राहत शिविर और सामुदायिक रसोई की व्यवस्था शुरू कर दी है।
कुढ़नी में नहर का तटबंध टूटा
तुर्की थाना क्षेत्र के खरौनाडीह में तिरहुत कैनाल नहर का पूर्वी तटबंध गैस गोदाम के पास करीब 40 फुट में मंगलवार दोपहर टूट गया। इससे पानी ने आवासीय इलाकों में तेजी से प्रवेश कर लिया और क्षणभर में चार सौ की आबादी वाला क्षेत्र जलमग्न हो गया। ग्रामीणों ने परियोजना विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया है कि मरम्मती के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जाती रही। देर शाम तक नहर की मरम्मत का काम चल रहा था।
विद्यालयों में पानी, पढ़ाई ठप
बाढ़ का असर शैक्षणिक संस्थानों पर भी दिखा है। तेहबारा, बुधकारा, बेलपकौना सहित कई इलाकों के विद्यालयों में पांच से छह फुट तक पानी जमा होने से पठन-पाठन पूरी तरह बंद है। बकुची स्थित पावर सब-स्टेशन में पानी घुस जाने से विद्युत आपूर्ति बाधित है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस साल की बाढ़ ने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं और प्रशासन को राहत एवं पुनर्वास योजना पर तत्काल कदम उठाने की जरूरत है।




