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नेपाल में जेन जेड का गुस्सा: सोशल मीडिया बैन और भ्रष्टाचार के खिलाफ सड़कों पर उतरें युवा

काठमांडू और आसपास के इलाकों में छात्रों के नेतृत्व में प्रदर्शन, हिंसा में 19 मौतें, गृह मंत्री का इस्तीफा

काठमांडू: नेपाल की राजधानी काठमांडू में मंगलवार को भी छात्रों के नेतृत्व में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए, जो सरकार के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर लगाई गई रोक के खिलाफ थे। कोरोना प्रतिबंधों और सार्वजनिक सभा पर पाबंदियों को दरकिनार कर हजारों युवा सड़कों पर उतर आए और प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के इस्तीफे की मांग की। ये प्रदर्शन ‘जेन जेड प्रोटेस्ट’ के नाम से जाने जा रहे हैं, जिनमें मुख्य तौर पर 13 से 28 वर्ष के युवाओं ने हिस्सा लिया।

विरोध का कारण और विस्तार
नेपाल सरकार ने 4 सितंबर 2025 को 26 प्रमुख सोशल मीडिया साइट्स जैसे फेसबुक, व्हाट्सएप, यूट्यूब, और एक्स (पूर्व ट्विटर) को बंद कर दिया था, क्योंकि ये कंपनियां सरकार द्वारा तय की गई पंजीकरण प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाई थीं। सरकार ने कहा कि पंजीकरण इस लिए जरूरी था ताकि सोशल मीडिया पर साइबर अपराध, गलत सूचना और भ्रामक सामग्री को कंट्रोल किया जा सके। हालांकि आलोचक इसे सेंसरशिप और विरोधियों को दबाने का प्रयास मान रहे थे।

सरकार का यह कदम युवाओं के बीच नाराजगी का बड़ा कारण बना, खासतौर पर सोशल मीडिया के जरिए अपने विचार जाहिर करने वाले युवा। नगलंकी, बनेश्वर, ललितपुर के चापागाउँ-थेचो जैसे इलाकों में छात्रों ने रोड पर टायर जलाकर प्रदर्शन शुरू किया। कुछ प्रदर्शनकारियों ने सूचना और संचार मंत्री पृथ्वी सुब्बा गुरुङ के निवास पर पत्थर फेंके, जिनके द्वारा सोशल मीडिया साइट्स पर बैन लगाया गया था। इसके अलावा पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दाहाल ‘प्रचंड’ और शेर बहादुर देउबा के घरों के सामने भी प्रदर्शन किए गए।

प्रदर्शन हिंसक क्यों हुए?
प्रदर्शन शुरू तो शांतिपूर्ण थे, लेकिन जैसे-जैसे पुलिस ने उनसे निपटने के लिए सख्ती बरती, हालात हिंसक हो गए। पुलिस ने भीड़ को रोकने के लिए आंसू गैस, वाटर कैनन, रबर की गोलियां और लाइव गोलियां चलाईं। इससे कम से कम 19 लोगों की मौत हो गई और 300 से ज्यादा लोग घायल हो गए। पुलिस के इस कड़े रुख के खिलाफ लोगों का गुस्सा और बढ़ गया, जिसके बाद नेपाल की सेना को राजधानी में तैनात करना पड़ा ताकि स्थिति काबू में रहे।

सरकार की प्रतिक्रिया और बाद की कार्रवाइयां

हिंसक घटनाओं और बढ़ते दबाव के बाद गृह मंत्री रमेश लेखाख ने इस्तीफा दे दिया, उनका कहना था कि वे इस हिंसा के लिए नैतिक जिम्मेदारी लेते हैं। सरकार ने बाद में सोशल मीडिया पर लगाई गई पाबंदियां हटा लीं। काठमांडू, ललितपुर और भक्तपुर जिलों में कर्फ्यू लगाया गया ताकि और अधिक हिंसा को रोका जा सके।

युवा वर्ग की मांगें और व्यापक कारण

जेन जेड यानी युवा पीढ़ी ने केवल सोशल मीडिया बैन के खिलाफ नहीं, बल्कि नेपाल में फैली व्यापक भ्रष्टाचार, सरकारी निकायों में नौकरी और संसाधनों में परिवारवाद व भेदभाव के खिलाफ भी प्रदर्शन किया। युवा दावा करते हैं कि सत्ता के नजदीकी लोग अपने बच्चों और रिश्तेदारों को सरकारी पद धारित कराकर देश के संसाधनों का दुरुपयोग कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर इसे लेकर चर्चा ने आंदोलन को और ताकत दी।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय और अमनेस्टी इंटरनेशनल ने पुलिस की कार्रवाई की कड़ी निंदा की और स्वतंत्र जांच की मांग की। कई देशों ने नेपाल सरकार से हिंसा को नियंत्रित करने और शांतिपूर्ण समाधान खोजने का आग्रह किया।
नेपाल में इस समय राजनीतिक अस्थिरता अपने चरम पर है और जेन जेड के इस आंदोलन ने सरकार के लिए बड़े चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। युवा वर्ग ने सोशल मीडिया, भ्रष्टाचार, और सरकारी जवाबदेही जैसे मसलों पर अपनी आवाज बुलंद की है। ये घटनाएं नेपाल के लोकतांत्रिक सफर और सरकार की काबिलियत पर सवाल उठा रही हैं। आने वाले दिनों में इन विरोध प्रदर्शनों की दिशा और सरकार की प्रतिक्रिया इस हिमालयी देश की राजनीति और सामाजिक स्थिरता के लिए निर्णायक हो सकती है।

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