Jagannath Rath Yatra 2026: भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा को लेकर पुरी में बढ़ी रौनक, जोरों-शोरों से हो रहा रथ निर्माण का कार्य
ओडिशा। Jagannath Rath Yatra 2026: महाप्रभु जगन्नाथ की रथ यात्रा सभी धार्मिक त्योहारों में से एक है। जिसे मुख्य रूप से ओडिशा में बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है। पुरी शहर में स्थित जगन्नाथ मन्दिर से प्रारंभ होता है और भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र तथा बहन सुभद्रा देवी को समर्पित होता है। इस तीनों देवता अपनी मौसी के घर जाते हैं। वहीं रथ यात्रा को लेकर तैयारियां शुरू हो गई है। रथ के पहिए बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
Read More: CG Police Transfer: बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, जिले के 108 पुलिसकर्मियों का तबादला, जानें किसे कहां मिली पोस्टिंग
बता दें कि, थों का निर्माण सोने की कुल्हाड़ी से शुरू हो गया है। इस साल यह रथ यात्रा 16 जुलाई से शुरू हो रही है। वहीं अक्षय तृतीया के दिन से धौरा लकड़ी की पूजा-अर्चना के बाद स्वर्ण कुल्हाड़ियों से प्रतीकात्मक स्पर्श कर (Jagannath Rath Yatra 2026) निर्माण कार्य का शुभारंभ किया गया। इस वर्ष रथ निर्माण में 215 महाराणा और भोई सेवायत कारीगरों सहित 200 से अधिक शिल्पकारों को लगाया गया है, जो पीढ़ियों से इस परंपरा को निभाते आ रहे हैं।

Read More: CG Weather Update: भीषण गर्मी के बीच मौसम ने ली करवट, प्रदेश के कई जिलों में जताई गई बारिश की संभावना, गर्मी से मिलेगी राहत
Jagannath Rath Yatra 2026: तीनों रथ-भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और भगवान जगन्नाथ-के निर्माण में कुल 865 विशेष लकड़ियों का उपयोग किया जाएगा। मालूम हो की यह यात्रा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है। इसमें लाखों श्रद्धालु देश-विदेश से शामिल होते हैं। भक्त रथों की रस्सियों को खींचकर स्वयं को भगवान की सेवा से जोड़ने का सौभाग्य प्राप्त करते हैं। मान्यता है कि रथ यात्रा के दर्शन और रथ खींचने से पुण्य प्राप्त होता है। इस उत्सव में सभी जाति और समुदाय के लोग भाग लेते हैं, इसलिए इसे सामाजिक समरसता का प्रतीक भी माना जाता है।




