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अब बच्चों को चुपचाप पढ़ने की जगह जोर से पढ़ना होगा!

बिहार के सरकारी स्कूलों में पहली-दूसरी के बच्चों के लिए ‘लाउड रीडिंग’ अनिवार्य कर दी गई है।

बच्चे अब पढ़ेंगे जोर से, समझेंगे बेहतर – पढ़ाई का तरीका बदला

मुजफ्फरपुर. सरकारी स्कूलों के छोटे बच्चों के लिए पढ़ाई का अंदाज़ अब बदल गया है। शिक्षा विभाग ने पहली और दूसरी कक्षा में हर दिन एक पीरियड “लाउड रीडिंग” यानी जोर से पढ़ने के लिए अनिवार्य कर दिया है।

कारण साफ है—बच्चे जब जोर से पढ़ेंगे तो शब्दों से उनका परिचय और गहरा होगा, उच्चारण सुधरेगा और आत्मविश्वास भी बढ़ेगा। हाल के सर्वे में यह पाया गया कि तमाम योजनाओं के बावजूद बच्चों के सीखने के स्तर में खास सुधार नहीं हुआ। अब विभाग को उम्मीद है कि यह नया तरीका पढ़ाई को ज्यादा प्रभावी बनाएगा।

क्या है फायदा?
जोर से पढ़ने पर बच्चे सिर्फ देखकर नहीं, बल्कि सुनकर और बोलकर भी सीखते हैं।
इससे उनकी समझने की क्षमता तेज होती है।
आत्मविश्वास और संवाद कौशल में भी सुधार आता है।
क्लासरूम का माहौल सक्रिय और जीवंत बनता है।

जिम्मेदारी भी तय

प्राथमिक शिक्षा निदेशक साहिला ने सभी जिलों को निर्देश दिया है कि इस व्यवस्था की सख्ती से मॉनिटरिंग हो।
हर सप्ताह प्रधानाध्यापक शिक्षकों से बैठक करेंगे और समस्याएं सुनेंगे।
अभिभावक-शिक्षक संगोष्ठी में बच्चों की प्रगति बताई जाएगी।
शिक्षक यह सुनिश्चित करेंगे कि हर बच्चे को बोलकर पढ़ने का मौका मिले।

लाइब्रेरी और वर्कबुक का सहारा

नये निर्देशों के तहत, लाउड रीडिंग के लिए स्कूल की लाइब्रेरी की किताबों का इस्तेमाल होगा। इसके बाद बच्चों को वर्कबुक में अभ्यास करवाना होगा और शिक्षक उसकी जांच करेंगे।

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