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दूषित पानी पीने से अब तक 15 की मौत, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सरकार पर साधा निशाना, कहा-प्रशासन कुंभकर्णी नींद में रहा’

इंदौर। Indore News: मध्यप्रदेश का इंदौर शहर के भागीरथपुरा  में बीते 31 दिसंबर को दूषित पानी पीने से दर्जनों बच्चों की मौत हुई थी। वहीं अब इसमें मरने वालों का आंकड़ा बढ़ गया है। अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है। दूषित पानी की वजह से ही गई है। इसकी पुष्टि गुरुवार को महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज की लैब रिपोर्ट से हो गई। वहीं इससे प्रभावित 16 बच्चों समेत 201 लोग अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पीड़ित परिजनों को 2-2 लाख रुपए देने की घोषणा की है। वहीं इस मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो चुकी है। राहुल गांधी ने कहा कि, प्रशासन कुंभकर्णी नींद में है, तो वहीं पूर्व सीएम उमा भारती का भी बयान सामने आया है।

इस मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि,’इंदौर में पानी नहीं, ज़हर बंटा और प्रशासन कुंभकर्णी नींद में रहा। घर-घर मातम है, गरीब बेबस हैं और ऊपर से BJP नेताओं के अहंकारी बयान। जिनके घरों में चूल्हा बुझा है, उन्हें सांत्वना चाहिए थी; सरकार ने घमंड परोस दिया। लोगों ने बार-बार गंदे, बदबूदार पानी की शिकायत की – फिर भी सुनवाई क्यों नहीं हुई? सीवर पीने के पानी में कैसे मिला? समय रहते सप्लाई बंद क्यों नहीं हुई?

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि, जिम्मेदार अफसरों और नेताओं पर कार्रवाई कब होगी? ये ‘फोकट’ सवाल नहीं – ये जवाबदेही की मांग है। साफ पानी एहसान नहीं, जीवन का अधिकार है। और इस अधिकार की हत्या के लिए BJP का डबल इंजन, उसका लापरवाह प्रशासन और संवेदनहीन नेतृत्व पूरी तरह ज़िम्मेदार है। मध्यप्रदेश अब कुप्रशासन का एपिसेंटर बन चुका है – कहीं खांसी की सिरप से मौतें, कहीं सरकारी अस्पताल में बच्चों की जान लेने वाले चूहे, और अब सीवर मिला पानी पीकर मौतें। और जब-जब गरीब मरते हैं, मोदी जी हमेशा की तरह खामोश रहते हैं।

 

Indore News: वहीं इस पर पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने कहा कि, साल 2025 के अंत में इंदौर में गंदे पानी पीने से हुई मौतें हमारा प्रदेश, हमारी सरकार और हमारी पूरी व्यवस्था को शर्मिंदा और कलंकित कर गईं। प्रदेश के सबसे स्वच्छ शहर का अवार्ड प्राप्त करने वाले नगर में इतनी बदसूरती, गंदगी, जहर मिला पानी जो कितनी जिंदगियों को निगल गया और निगलता जा रहा है, मौत का आंकड़ा बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि, जिंदगी की कीमत दो लाख रुपए नहीं होती, क्योंकि उनके परिजन जीवन भर दुःख में डूबे रहते हैं। इस पाप का घोर प्रायश्चित करना होगा, पीडितजनों से माफी मांगनी होगी और नीचे से लेकर ऊपर तक जो भी अपराधी हैं उन्हें अधिकतम दंड देना होगा। यह मोहन यादव जी की परीक्षा की घड़ी है।

 

 

 

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